पुलिस महकमे में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन मुजफ्फरपुर में महज एक महीने के भीतर जारी हुए दो आधिकारिक आदेशों ने पूरे सिस्टम पर नई बहस छेड़ दी है। जिस पुलिस निरीक्षक रामएकबाल प्रसाद को गंभीर लापरवाही, अनुसंधान में शिथिलता और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा के आधार पर थाने से हटाकर पुलिस केंद्र भेजा गया था, उसी अधिकारी को अब फिर से थाने की कमान सौंप दी गई है। इस फैसले ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली, विभागीय जांच और जवाबदेही पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, 9 जून 2026 को एसएसपी कार्यालय की ओर से जारी आदेश में तत्कालीन मीनापुर थानाध्यक्ष रामएकबाल प्रसाद को तत्काल प्रभाव से पुलिस केंद्र भेज दिया गया था। आदेश में उनके खिलाफ गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया था। इनमें अनुसंधान में लापरवाही, दोहरे हत्या’कांड की जांच में शिथिलता, लंबे समय से लंबित गंभीर मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं करना, अनिवार्य होने के बावजूद अधिकांश मामलों में एफएसएल टीम को नहीं बुलाना, अभिलेख एवं डेटा प्रबंधन में लापरवाही तथा स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देना जैसी बातें शामिल थीं।











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