पटना: यूजीसी एक्ट 2026 को लेकर देशभर में उबाल है. बिहार की राजधानी पटना समेत कई जिलों में सवर्ण वर्ग के छात्र इसका विरोध कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर छात्र खुलकर अपनी बात रख रहे हैं. कई विश्वविद्यालयों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लगातार विरोध को देखते हुए इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गयी है. सवाल है कि यह कानून क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?

क्या है कानून?
UGC ने उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और निगरानी के लिए नए नियम और एक व्यापक कानून का प्रस्ताव रखा है. UGC का दावा है कि इसका मकसद विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है.

नए कानून के उद्देश्य
नए कानून के तहत सभी शैक्षणिक संस्थानों को UGC के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा. नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक जुर्माना, संस्थान की मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई के साथ-साथ गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई और जेल की सजा का भी प्रावधान प्रस्तावित है. उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता लाना, SC/ST और OBC के छात्रों की सुरक्षा, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव रोकना उद्देश्य है.

सवर्ण वर्ग के छात्रों का विरोध
विश्वविद्यालय और कॉलेजों में इस तरह के नियम लागू होने से इसका विरोध शुरू हो गया है. विरोध करने वालों में सामान्य वर्ग के छाक्ष-छात्राएं और शिक्षाविद् शामिल हैं. हालांकि कई शिक्षाविद् इस नियम को सही बता रहे हैं और कहते हैं कि इससे संस्थान में समानता बढ़ेगी. कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव नहीं होगा.









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