निर्जला एकादशी 2024: निर्जला एकादशी व्रत इस साल 18 जून को रखा जा रहा है। एकादशी व्रत रख रहे हैं, तो आपको एकादशी माता कौन थी और इस चावल क्यों नहीं खाए जाते है, इसके बारे में जानकार होनी चाहिए।


आपको बता दें कि एकादशी माता का जन्म उत्पन्ना एकादशी पर हुआ था। एकादशी एक देवी थी, जिनका जन्म भगवान विष्णु से हुआ था। उन्होंने असुरों को मारने में भगवान विष्णु की मदद की। इस पर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा, इस पर कन्या ने मांगा कि अगर कोई मनुष्य मेरा उपवास करे तो उसके सारे पाप नाश हो जाएं और उसे विष्णु लोक मिले। तब भगवान ने उस कन्या को एकादशी नाम दिया और वरदान दिया कि इस व्रत के पालन से मनुष्य जाति के पापों का नाश होगा और उन्हें विष्णु लोक मिलेगा।


महाराज ने इस विषय में एक कथा सुनाई है। उनके अनुसार जब विष्णु जी ने एकादशी से सभी पापों को नष्ट करने के लिए कहा। जब एकादशी सभी पाप नष्ट करने चली तो कुछ पाप चावल में छिप गए। इससे नाराज एकादशी ने चावल को श्राप दिया कि तुमने चावल को स्थान दिया है, इसलिए तुम्हें इस दिन कोई नहीं खाएगा। ऐसा कहा जाता है इस दिन सभी पाप चावल में होते हैं और यही वजह है कि एकादशी पर चावल नहीं खाए जाते।



एकादशी के दिन कोई चावल नहीं खाता , लेकिन जो व्रत रखते हैं, उन्हें अगले दिन व्रत का पारण चावल खाकर ही करना चाहिए। तभी व्रत संपूर्ण होता है। आपको बता दें कि एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि की शाम से करना चाहिए और अगले दिन व्रत रखकर पारण द्वादशी को सुबह करना चाहिए।













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