मुजफ्फरपुर: नव संचेतन ने इमलीचट्टी स्थित लिच्छवी बिहार में भिखारी ठाकुर के नाटक गबरघिचोर का मंचन किया। नाटक का उद्घाटन समाजसेवी अविनाश तिरंगा ने किया। नाटक में अंधविश्वास, बेरोजगारी, स्त्री पीड़ा और सामाजिक कुरीतियों को बखूबी दर्शाया गया। 





नाटक में दिखाया गया कि गलीज शादी कर गांव छोड़कर कमाने परदेस जाता है। पति के जाने के बाद गलीज बहू का गांव के ही एक मनचले युवक से संबंध हो जाता है। समाज की सारी लानतों के बावजूद वह अपने पुत्र का बड़े प्यार से लालन पालन करती है, गबरघिचोर पंद्रह साल का हो गया, गलीज को परदेस में उसके गांव का कोई यह घटना बता देता है। गलीज लौटता है और पत्नी को छोड़ गबरघिचोर को अपने साथ शहर ले जाना चाहता है, लेकिन गलीज बहू बच्चे को छोड़ने को तैयार नहीं होती है. तब पंच आते हैं और तीनों से सबूत पेश करने को कहते और तीनों बेटे के हक में अपना-अपना सबूत पेश करते हैं, नाटक में कामेश्वर प्रसाद ने पंच, आस्था कुमारी ने गलीज वह शेखर सुमन ने गलीज, संजय रमण ने गड़बड़ी, संस्कृति श्री ने गबरघिचोर, सुमन वृक्ष ने सूत्रधार, प्रमोद कुमार सहनी ने जल्लाद, सुमित कुमार ने चेला, शुभांगी कुमारी ने नतंकी, अमन कुमार, अभिषेक रंजन, सुमित कुमार, आकाश कुमार, चंदन कुमार ने ग्रामीण पुरुष, मुस्कान, आयशा रानी, तनीषा, माधुरी कुमारी और शुभांगी ने ग्रामीण स्त्री की भूमिका निभायी।


हारमोनियम पर डॉ संजय कुमार संजू ने साथ दिया। गायन में अभिषेक रंजन, मुस्कान कुमारी और तनीषा थीं। ढोलक पर अंकित कुमार थे। प्रकाश संयोजन सुनील फेकानिया का था, नृत्य निर्देशन अलक नंदा वत्स, रूप सज्जा निशा रूप से मौजूद थे।

वस्त्र-सज्जा अनुराधा कुमारी और मंच सज्जा अब्दुल्ला अजीज ने किया। इस मौके पर गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं. विनय पाठक, मुकेश त्रिपाठी, शंभुनाथ चौबे, डॉ एचएन भारद्वाज, कुमार विरल, विभेष त्रिवेदी, रामप्रवेश सिंह, केशव चौबे, अखिलेश राय, विकास नारायण उपाध्याय, प्रमोद आजाद, डॉ नवनीत शांडिल्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

















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