बिहार के भागलपुर जिले में स्थित सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम पर श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में कांवरिये रोजाना जल उठाकर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर जा रहे हैं।
यहां आने वाले कांवरिये चार तरह के होते हैं। इनमें से कुछ 24 घंटे के अंदर कांवर यात्रा पूरी करते हैं, तो कुछ ऐसे होते हैं जो दो-तीन महीने तक लगा देते हैं।
सुल्तानगंज से देवघर के बीच कच्चा कांवरिया पथ बनाया गया है। इसकी दूरी लगभग 105 किलोमीटर है। अधिकतर कांवरिये सुल्तानगंज से गंगा जल उठाकर झूमते-गाते, खाते-पीते कांवर लेकर निकलते हैं, वे 3 से 5 दिनों में देवघर पहुंचते हैं। इन्हें सामान्य बम कहा जाता है। कांवरियों में सामान्य बम की संख्या सबसे ज्यादा होती है।
24 घंटे में कांवर लेकर सुल्तानगंज से देवघर पहुंचते हैं डाक बम
दूसरे कांवरिये होते हैं डाक बम, श्रावणी मेले के दौरान सबसे ज्यादा जलवा इन्हीं का होता है। डाक बम सुल्तानगंज से जल उठाते हैं और बिना रुके दौड़ते-भागते बाबा धाम पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं। ये 24 घंटे के भीतर 105 किलोमीटर की दूरी तय कर लेते हैं। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में डाक बमों के लिए पूजा की खास व्यवस्था होती है।
इसी तरह तीसरे कांवरिये होते हैं दांडी बम। ये दंड प्रणाम करते हुए अपनी आगे बढ़ते हैं। इन्हें कांवर यात्रा पूरी करने में 2 से 3 महीने का समय लग जाता है। धीरे-धीरे इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
चौथे कांवरिये वो श्रद्धालु होते हैं जो खड़ी कांवर लेकर जाते हैं। ये कांवरिये कंधे पर जल उठाने के बाद नीचे नहीं रखते हैं। रास्ते में उन्हें कुछ खाना-पीना हो तो किसी अन्य व्यक्ति के कंधे पर कांवर रख देते हैं, जो कुछ देर उसे लेकर खड़े रहते हैं। फिर वापस कांवरियों को दे देते हैं।
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