मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिया है कि जहां कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, उन्हें एपीसेंटर मानते हुए उसके तीन किमी की परिधि में भी डोर टू डोर स्क्रीनिंग कराएं. इस निर्देश के तहत अब बिहार के उन चार जिलों में डोर टू डोर स्क्रीनिंग होगी, जहां कोरोना के सबसे अधिक मामले पाए गए हैं. पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर सिवान, बेगूसराय, नालंदा और नवादा (Siwan, Begusarai, Nalanda and Nawada) में 16 अप्रैल से सरकार डोर टू डोर स्क्रीनिंग अभियान चलाएगी. इसके तहत घर-घर जाकर यह पता लगाया जाएगा कि एक मार्च से 23 मार्च के बीच उनके घर में बाहर से कोई आया या नहीं.

इसके साथ ही बिहार मे जहां भी कोरोना संक्रमित मरीज पाए गए हैं, उस जगह को मुख्य केंद्र मानते हुए उसके 3 किलोमीटर के अंदर डोर टू डोर स्क्रीनिंग करायी जाएगी. दरअसल, बिहार सरकार को आशंका है की तीन किलोमीटर में रहने वाले लोगों में संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा रहता है. इसी वजह से ऐसा क़दम उठाने की ज़रूरत है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिए ये खास निर्देश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्चस्तरीय बैठक में ये भी कहा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. जो चिकित्सीय स्टाफ जांच के लिए जाते हैं, उनकी सुविधा और सुरक्षा का ख्याल रखें. जांच करने वाले कर्मियों को पूरी ट्रेनिंग दी जाए. बैठक में मुख्य सचिव दीपक कुमार और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार भी मौजूद थे. बता दें कि बिहार में अब तक कोरोंना के 66 मामले मिले हैं. इनमें सबसे अधिक सीवान में 29, बेगूसराय में 8, नालंदा और नवादा में 3-3 मामले पाए गए हैं.
दो-दो लोगों की टीम करेगी जांच
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान में दो-दो लोगों की टीम बना कर जांच कराई जाएगी. उसके ऊपर एक सुपरवाइज़र होगा, जो स्क्रीनिंग किए गए लोगों की लिस्ट बना कर सम्बंधित परखंड में जमा करेंगे जहां इसकी सूचि तैयार की जाएगी. जिनमें कोरोना के लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें प्रखंड स्तर पर बने क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जाएगा.
Source: News18






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