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मुजफ्फरपुर: दिव्यांगता की बाधा तोड़ दिव्यांगों को मुजफ्फरपुर में दे रहे रोजगार

दिव्यांगता जीवन की राह में कभी बाधा नहीं बनी। हौसले ने जरा सी उड़ान भरी तो सारा आकाश अपना हो गया। एक हाथ और पांव से दिव्यांग राजकुमार ने कुछ ऐसा ही किया। वे मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज-दो में ‘दिव्यांग रोजगार केंद्रÓ चला रहे। इसमें सिर्फ दिव्यांगों को रोजगार दिया है। प्रतिमाह 50 हजार से एक लाख तक की आमदनी कर रहे हैं। इससे उन्होंने बता दिया है कि दिव्यांग भी किसी से कम नहीं हैं।

लेनिन चौक सराय सैयद अली लेन निवासी राजकुमार ने जून, 2019 में खादी ग्रामोद्योग केंद्र से मसाला, सत्तू, बेसन आदि की पिसाई व पैकिंग का प्रशिक्षण लिया था। दिव्यांगता की वजह से कहीं काम नहीं मिल रहा था। वर्ष 2020 के मार्च में उन्होंने बेला औद्योगिक इलाके में यूनिट लगाने की पहल की। लॉकडाउन से पहले उन्होंने उत्पादन शुरू कर दिया। हालांकि, उस दौर में एक नई यूनिट संभालना चुनौती भरा रहा। बाद के दिनों में बाढ़ ने भी रोजगार चौपट कर दिया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने सात दिव्यांगों को काम दिया है। ये लोग पिसाई के अलावा पैकिंग व काउंटिंग का काम करते हैं। उनके साथ काम करने वाले श्रमिकों को तीन हजार तक पारिश्रमिक दिया जाता है। इसके अतिरिक्त उनके रहने व खाने-पीने की व्यवस्था है।

राजकुमार गुप्ता की फैक्ट्री में काम करनेवाले मालीघाट निवासी विनोद साहनी पांव से दिव्यांग हैं। उनका कहना है कि वे पैकिंग का काम करते हैं। यहां काम करने से पहले नाश्ते-पानी का होटल चला रहे थे, लेकिन वह बंद हो गया। जिला खादी उद्योग केंद्र में राजकुमार से मुलाकात हुई और उनके यहां काम मिल गया।

यूनिट में प्रतिमाह 30 से 35 क्विंटल सत्तू व बेसन, 10 से 15 क्विंटल विभिन्न तरह के मसाले, हल्दी व मिर्च पाउडर तैयार हो रहा है। चने की खरीदारी स्थानीय थोक मंडी से होती है। हल्दी, धनिया, जीरा व मिर्च आदि समस्तीपुर से आता है। उत्पाद का भाव स्थानीय मंडी के अनुसार तय होता है। सप्लाई मुजफ्फरपुर व आसपास के जिलों में होती है।

उद्योग शृंखला बनाने की योजना :
राजकुमार का कहना है कि उन्होंने 100 दिव्यांगों को रोजगार देने की योजना बनाई है। वे कागज का कटोरा, मिठाई का डिब्बा, मोमबत्ती, झाडू, रूई बत्ती आदि बनाना चाहते हैं। इसके लिए जिला खादी ग्रामोद्योग संघ से संपर्क किया गया है। प्रशिक्षण मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। उनके पास सरकार की ओर से आवंटित साढ़े तीन कट्ठा जमीन है।

– देखकर अच्छा लगता है कि दिव्यांगजन रोजगार के जरिये समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इस तरह के जो भी लोग हैं, उन्हें सहयोग किया जा रहा है।

परिमल कुमार सिन्हा, महाप्रबंधक, जिला उद्योग।

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