बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Legislative Assembly Election 2020) में मिली करारी हार के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) की खबरें आजकल लोगों को कम ही मिल रही हैं। हमेशा खबरों में बने रहने वाले चिराग आजकल आराम के मूड में दिख रहे हैं। बिहार विधानसभा में पिछले दिनों अभूतपूर्व हं’गामा, मा’रपी’ट और उ’पद्रव हुआ, पटना में डाकबंगला चौराहे पर जमकर ब’वाल कटा, मधुबनी में होली के दौरान ही एक ही परिवार के छह लोगों की निर्मम ह’त्या कर दी गई, नवादा में इसी हफ्ते संदिग्ध तरीके से 16 लोग एक के बाद एक म’र गए, लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद चिराग की कोई खास गतिविधि बिहार में नहीं दिखी। क्या आप जानना चाहेंगे कि चिराग आजकल कहां हैं और क्या कर रहे हैं?
मुश्किल दौर से उबरने को सही वक्त का इंतजार
चिराग पासवान आजकल बिहार के राजनीतिक गलियारे में अपनी सक्रियता सीमित कर दिए हैं। विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी के कई नेता राजद सहित दूसरे दलों में शामिल हो गए। उनकी पार्टी की इकलौती विधान पार्षद नूतन सिंह तो सहयोगी दल भाजपा में ही चली गईं। नतीजा यह है कि बिहार की ही पार्टी होने के बावजूद बिहार में अब लोजपा के पास न तो कोई विधायक है और न कोई विधान पार्षद। अपने पिता और पार्टी के संस्थापक पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के ठीक बाद ऐसी मुश्किल परिस्थिति से पार्टी को उबारने के लिए चिराग नए सिरे से रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसके लिए वे लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं और बिहार के लोगों से संवाद बनाए रखे हुए हैं।
शनिवार को भी पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले चिराग
हमने चिराग पासवान और लोजपा के इंटरनेट मीडिया प्रोफाइल को खंगाला तो पता चला कि लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजकल दिल्ली में हैं। उन्होंने शनिवार को दिल्ली के 12 जनपथ स्थित लोजपा कार्यालय में आम जनता और पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इसकी तस्वीरें लोजपा के फेसबुक पेज पर ट्वटिर हैंडल पर साझा की गई हैं। इससे पहले 26 मार्च, 24 मार्च और 23 मार्च को भी उन्होंने दिल्ली स्थित कार्यालय में ही आम लोगों से मुलाकात की। इसके ठीक पहले वे जम्मू कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर गए थे।
क्या चिराग के राजनीतिक रुख में आया है कोई बदलाव
चिराग पासवान के राजनीतिक रूख में आजकल थोड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बिहार की सरकार और जदयू के प्रति वे पहले की तरह आक्रामक नहीं दिखते हैं। उन्होंने ऐसा आखिरी बयान मार्च के तीसरे हफ्ते में दिया था, जिसे बिहार की सरकार के विरोध में माना जा सकता है। इसके बाद बिहार में काफी कुछ बड़ा हुआ, लेकिन चिराग प्राय: चुप ही रहे हैं। इसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के प्रति उनके नर्म हुए रुख का संकेत माना जा सकता है। मधुबनी में छह लोगों की हत्या के बाद वहां दौरे पर गए लोजपा के नेताओं के बयान भी ऐसा ही संकेत करते हैं। लोजपा ने इस मसले पर दूसरे विपक्षी दलों की तरह सरकार को घेरने से परहेज किया है।
भाजपा के प्रति लगातार सॉफ्ट हैं चिराग पासवान
चिराग पासवान ने जता दिया है कि वे फिलहाल एनडीए यानी भाजपा को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं, बावजूद इसके कि बिहार के कुछ नेता ऐसा नहीं चाहते। हो सकता है कि समय के साथ बिहार के ऐसे नेताओं की सोच में भी बदलाव आए। चिराग के बयान लगातार भाजपा के समर्थन में ही रहे हैं। पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान उन्होंने इस प्रदेश से धारा 370 हटाए जाने के फैसले को सराहा।












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