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बिहार में जमीन म्यूटेशन के लिए बन रहे नये नियम, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी पर कर्मचारी से लेकर सीओ तक पर होगी कार्रवाई

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दाखिल- खारिज में गलती को लेकर विभाग के कर्मियों को भी जिम्मेवार बनाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए नया कानून बनाने का प्रस्ताव तैयार हो रहा है. भूमि विवाद को रोकने के मकसद से बनाये जा रहे इस कानून में दाखिल- खारिज में गड़बड़ी करने पर राजस्व कर्मचारी से लेकर सीआइ व सीओ तक पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान होगा.

राजस्व एवं भूमि-सुधार मंत्री रामसूरत राय ने बताया कि दाखिल -खारिज में गड़बड़ी एक गंभीर समस्या है. अक्सर यह मामला आता रहता है कि एक ही जमीन में से मालिक एक से अधिक लोगों को जमीन बेच देते हैं. ऐसा भी होता है कि यदि किसी के पास एक एकड़ जमीन है और वह उस जमीन में से तीन चार लोगों के हाथों बेचता है, उसमें एक एकड़ की जगह उन क्रेताओं के बीच डेढ़ एकड़ तक रजिस्ट्री कर दी जाती है. उसमें पहले रजिस्ट्री कराने वाले क्रेता दाखिल -खारिज के लिए आवेदन देता है तो उसे रोक कर दूसरे या तीसरे क्रेता के नाम पर पहले दाखिल- खारिज कर दिया जाता है और पहले वाले को पहले आवेदन देने के बाद भी लटका कर रखा जाता है. ऐसे मामले में राजस्व कर्मचारी से लेकर सीओ तक शामिल होते हैं. इसलिए इस तरह की गड़बड़ी करने वालों पर कानूनी कार्रवाई के लिए कानून लाने की तैयारी की जा रही है.

मंत्री ने कहा कि दाखिल- खारिज के लिए मिले आवेदन को खारिज करने पर उसे खारिज करने का कारण भी बताना होगा. यह नियम 26 मार्च से लागू कर दिया गया है. एक अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री के साथ ही दाखिल- खारिज के लिए आवेदन लिया जायेगा और 35 रोज में दाखिल- खारिज हो जायेगा. इसमें कर्मचारी व अंचल का दौरा करना नहीं होगा. यह उन जमीनों के लिए है जिसके विक्रेता के नाम से जमीन की जमाबंदी है. जिसमें विक्रेता के नाम से जमाबंदी नहीं है उसमें जमाबंदी के लिए आवेदन देना होगा. जमाबंदी के बाद उसका दाखिल -खारिज होगा.

राजस्व एवं भूमि-सुधार मंत्री रामसूरत राय ने बताया कि सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए प्रखंड क्षेत्रों की व्यावसायिक जमीन से भी टैक्स की वसूली की जायेगी. इसको लेकर सर्वे किया जा रहा है. मंत्री ने कहा कि अनुमंडल व प्रखंड मुख्यालयों के आस-पास के साथ ही गांवों में भी बड़े-बड़े बाजार हैं, जहां दुकानें बनाकर जमीन मालिक किराया वसूल रहे हैं. वैसे भूमि का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, लेकिन सरकार को खेती की भूमि का राजस्व ही मिल रहा है. ऐसे कुछ ही जमीन मालिक हैं जो बैंकों से ॠण लेने की जरूरत पड़ने पर ही व्यावसायिक टैक्स देते हैं. अब ऐसे किसानों से जमीन का व्यावसायिक टैक्स लिया जायेगा. इसमें किसानों के उपयोग में आनेवाली भूमि को अलग रखा जायेगा.

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