Press "Enter" to skip to content

बिहार: चोरी-छुपे शराब नहीं जहर पी रहे हैं आप! धंधेबाज बना रहे 100 रुपये में एक बोतल जानलेवा ब्रांडेड अंग्रेजी शराब

सावधान! पटना में ब्रांडेड शराब की एक बोतल मात्र 100 रुपये की लागत से बनायी जा रही है. इस पर विभिन्न ब्रांडेड कंपनियों का रैपर लगा कर उसे 1000 से 2000 रुपयों के बीच बाजार में शराब तस्कर बेच रहे हैं. यह शराब पूरी तरह से नकली है और इसे पीने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा. यहां तक की लिवर व किडनी भी खराब हो सकती है. इस शराब को बनाने में घटिया स्प्रिट व अन्य सामान का उपयोग किया जा रहा है. इसके साथ ही अल्कोहल का प्रतिशत भी सही नहीं रहता है.

ऐसे हुआ खुलासा
इसका खुलासा उस समय हुआ जब उत्पाद विभाग की टीम ने दीदारगंज थाना क्षेत्र के हनुमानचक के खेत के बीच मकान व गोदाम में छापेमारी कर नकली शराब बनाने की फैक्टरी का पर्दाफाश किया. छापेमारी में यहां से बोतल, कॉर्क, कई ब्रांडेड कंपनियों के रैपर, बॉटलिंग मशीन, स्प्रिट, पाउडर, एसेंस आदि बरामद किया गया.

कैसे बनाते हैं नकली अंग्रेजी शराब
शराब तस्कर स्प्रिट व एसेंस के माध्यम से शराब बना कर उसे बोतल में बंद कर बॉटलिंग मशीन के माध्यम से पैक कर देते थे और उस पर किसी भी ब्रांडेड कंपनी का रैपर लगा देते थे. उस रैपर पर ओनली सेल इन झारखंड या ओनली सेल इन पश्चिम बंगाल अंकित कर देते थे, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके कि यह शराब की बोतल संबंधित राज्य से लायी गयी है. गोदाम से एक हाइड्राेमीटर भी बरामद किया गया था, जिससे शराब में अल्कोहल के प्रतिशत को मांपा जाता था और फिर उसे बोतल में भर कर बंद कर दिया जाता था. एक तरह से शराब एक ही तरह की होती है लेकिन उन पर अलग-अलग रैपर लगा कर उसे विभिन्न कंपनियों मसलन रॉयल स्टेग, ब्लेंडर प्राइड, ब्लू लेबल आदि में तब्दील कर देते थे.

सारा खेल स्पिरिट का, अगर शुद्ध नहीं हुआ तो हो जाता है जानलेवा
तस्करों को शराब बनाने के तरीके की जानकारी होती है. लेकिन शराब बनाने में सारा खेल स्पिरिट का होता है. स्पिरिट को केमिकल डाल कर शुद्ध किया जाता है, तब उसका इस्तेमाल शराब बनाने के लिए किया जाता है. लेकिन अगर स्पिरिट पूरी तरह शुद्ध नहीं हुई तो उससे बनी शराब जानलेवा हो सकती है या शरीर को अपंग कर सकती है.

जावा-महुआ के बजाये किशमिश से बना रहे देशी शराब
देशी शराब के तस्करों ने अब जावा-महुआ के बजाये किशमिश से शराब बनाना शुरू कर दिया है. आमतौर पर जावा-महुआ को इधर-उधर ले जाने पर पकड़े जाने का खतरा रहता है. इसके कारण तस्करों ने अब कम कीमत के सड़े-गले किशमिश से देशी शराब बनाने का धंधा शुरू कर दिया है. उत्पाद विभाग ने कई जगहों से किशमिश से बनी देशी शराब बरामद की तो इस बात की जानकारी हुई.

मात्र 100 रुपये में बनाते हैं ब्रांडेड शराब की एक बाेतल
ब्रांडेड शराब की एक बाेतल को शराब तस्कर मात्र 100 रुपये में बना लेते हैं. पहली बार पटना में नकली शराब बनाने की फैक्टरी काे पकड़ा गया है.
शैलेंद्र कुमार, इंस्पेक्टर, उत्पाद विभाग

Share This Article
More from BIHARMore posts in BIHAR »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *