मुजफ्फरपुर : अब गोदामों और घरों में रखे अनाज को चूहे नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) के विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मनेन्द्र कुमार ने चूहों से बचाव के लिए एक खास मशीन तैयार की है. इस मशीन का यूनाइटेड किंगडम में पेटेंट कराया गया है.

‘हजारों करोड़ का होता है नुकसान’
प्रो. मनेन्द्र कुमार ने बताया कि इस मशीन का नाम अल्ट्रासोनिक एंड सेंट बेस्ड रॉडेंट डिटेरेंट डिवाइस है. यह मशीन घरों, गोदामों, खेतों, अनाज भंडारण स्थलों, गाड़ियों और बिजली की तारों को चूहों से होने वाले नुकसान से बचा सकती है. उन्होंने कहा कि चूहे आज एक बड़ी समस्या बन चुके हैं. ये अनाज और सामान खराब करते हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चूहे हर वर्ष देश में खेतों और भंडारगृहों में रखी फसलों को लगभग 40 हजार करोड़ से 45 हजार करोड़ रुपये तक की क्षति पहुंचाते हैं.

आवाज से चूहे को परेशानी
प्रो. मनेन्द्र कुमार ने बताया कि यह मशीन खास तरह की अल्ट्रासोनिक आवाज निकालती है, जो इंसान को सुनाई नहीं देती, लेकिन चूहों को बहुत परेशान करती है. यह उपकरण 20,000 हर्ट्ज से 60,000 हर्ट्ज तक की अल्ट्रासोनिक ध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है.

मनुष्य सामान्यतः 20,000 हर्ट्ज से ऊपर की ध्वनि नहीं सुन पाता और उम्र बढ़ने के साथ यह सीमा लगभग 15,000 हर्ट्ज तक सिमट जाती है, लेकिन चूहे इन उच्च आवृत्तियों की ध्वनि को स्पष्ट रूप से सुनते हैं. चूहों के लिए 250 हर्ट्ज से 8,000 हर्ट्ज की ध्वनि अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है. यही कारण है कि यह ध्वनि उन्हें बेचैन कर देती है, जिससे वे उस स्थान पर टिक नहीं पाते और वहां से दूर भाग जाते हैं.

20-30 फीट तक असर
यह डिवाइस जहां भी लगाया जाता है, वहां लगभग 20 से 30 फीट के दायरे (रेडियस) में चूहे नहीं आते. इसमें अल्ट्रासोनिक मीटर स्वतः ऊपर-नीचे बदलता रहता है, जिससे चूहे ध्वनि के आदी नहीं हो पाते. इसके अलावा, इसमें पैसिव इन्फ्रारेड (PIR) मोशन सेंसर लगाया गया है, जो चूहों की गतिविधि को पहचानता है. माइक्रोकंट्रोलर आधारित नियंत्रण प्रणाली ध्वनि तंत्र और सुगंध उत्सर्जन को नियंत्रित करती है. यह उपकरण लो-पावर ऑपरेशन पर कार्य करता है तथा इसमें बैटरी और सोलर दोनों विकल्प उपलब्ध हैं.








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