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शिक्षा का मंदिर बना गंदी चैट का अड्डा! बिहार में गुरुजी हुए बेनकाब, अश्लील मैसेज की फाइल खुलते ही दो शिक्षक हुए सस्पेंड

बिहार : जिस जगह से संस्कार, तालीम और तहज़ीब की उम्मीद की जाती है, वहीं से शर्मनाक हरकतों की बदबू उठी है। शिक्षा के मंदिर को कुछ गुरुजी ने अपनी गंदी सोच से दाग़दार कर दिया। महिला शिक्षकों को व्हाट्सएप पर अश्लील मैसेज भेजने के मामलों में जांच पूरी होते ही विभाग ने सख़्त रुख अपनाया है। मुजफ्फरपुर डीईओ अरविन्द कुमार सिन्हा के निर्देश पर डीपीओ स्थापना इन्द्र कुमार कर्ण ने दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया है और विभागीय कार्रवाई की तलवार भी लटका दी है।

पहला मामला सकरा का है। यहां की एक शिक्षिका ने कुढ़नी के उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत अध्यापक दीपक कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। बताया गया कि दीपक कुमार पहले सकरा में ही पदस्थापित थे और वहीं से यह सिलसिला शुरू हुआ। माध्यमिक डीपीओ की जांच में अश्लील चैटिंग की पुष्टि हुई। शिक्षा का ककहरा पढ़ाने वाले गुरुजी, चैट में मर्यादा भूल बैठे और अब कुर्सी से नीचे।
दूसरा मामला मड़वन का है। यहां प्राथमिक विद्यालय के पंचायत शिक्षक संतोष कुमार दास पर महिला शिक्षक ने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार अश्लील मैसेज भेजे जा रहे थे। जब विरोध किया गया तो प्रताड़ना और धमकियों का दौर शुरू हो गया। पंचायत शिक्षक के निलंबन की अनुशंसा पंचायत सचिव राज महमदपुर को भेज दी गई है। यानी अब मामला देख लेंगे से आगे बढ़ चुका है।

पिछले चार महीनों में दो दर्जन से अधिक शिक्षिकाओं ने ऐसे ही शोषण के खिलाफ गुहार लगाई है। कई महिलाएं लिखित शिकायत देने से इसलिए पीछे हट गईं क्योंकि उन्हें धमकाया गया। पारू के तीन मामलों में अभी जांच जारी है। डीईओ ने दो टूक कहा है ऐसे मामलों में दोषी पाए गए तो सीधे निलंबन होगा, कोई रियायत नहीं।

सवाल बड़ा है क्या स्कूलों में पाठ्यक्रम बदल गया है? ब्लैकबोर्ड से व्हाट्सएप तक का यह सफ़र अगर यहीं नहीं रुका, तो शिक्षा का मंदिर और कितनी बार शर्मसार होगा? फिलहाल विभाग ने संदेश साफ कर दिया है गंदी चैट का अंजाम, सीधा सस्पेंशन।

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