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लॉटरी सिस्टम से BPSC अभ्यर्थी चुन रहे हैं अपना इंटरव्यू बोर्ड, चर्चा में ‘गुजरात मॉडल’

पटना : बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी कार्यालय में इन दिनों बीपीएससी 70वीं मेंस के सफल अभ्यर्थियों का इंटरव्यू चल रहा है. यह 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम चरण है. 21 जनवरी से इसकी शुरुआत हो चुकी है, जो 28 फरवरी तक चलेगा. हालांकि इस बार इंटरव्यू को लेकर आयोग ने एक बड़ा बदलाव किया है. अब इंटरव्यू में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को पहले से पता नहीं रह रहा है कि उनका इंटरव्यू बोर्ड में कौन शामिल है और कौन उनका इंटरव्यू लेंगे.

BPSC में पारदर्शिता बढ़ाना उद्देश्य

अभ्यर्थियों को 10 मिनट पहले पता चल रहा है कि इंटरव्यू बोर्ड में कौन होंगे. इसका चयन भी अभ्यर्थी खुद ही कर रहे हैं. दरअसल इस बार इंटरव्यू को लेकर आयोग ने बड़ा बदलाव किया है. पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से बीपीएससी ने पहली बार इंटरव्यू बोर्ड के आवंटन की प्रक्रिया में लॉटरी सिस्टम लागू किया है. इस नई व्यवस्था के तहत अब इंटरव्यू बोर्ड का चयन आयोग द्वारा पहले से तय नहीं किया जा रहा, बल्कि उम्मीदवार स्वयं लॉटरी के माध्यम से यह तय करेंगे कि उनका इंटरव्यू किस बोर्ड द्वारा लिया जाएगा. आयोग का मानना है कि इस व्यवस्था से इंटरव्यू प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेगी. वहीं विशेषज्ञ कह रहे हैं कि आयोग ने इसे गुजरात मॉडल की तर्ज पर लागू किया है. क्योंकि गुजरात में यह सिस्टम पहले से लागू है.

गुजरात मॉडल क्या है?

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर गुजरात मॉडल क्या है? दरअसल, गुजरात लोक सेवा आयोग ने इंटरव्यू प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जिस प्रणाली को अपनाया, उसे प्रशासनिक भाषा में गुजरात मॉडल कहा जाता है. इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उम्मीदवार और इंटरव्यू बोर्ड के बीच पहले से किसी भी तरह का संपर्क या पहचान न बन सके. इसमें इंटरव्यू बोर्ड का चयन पूरी तरह रैंडम तरीके से किया जाता है और उम्मीदवार को अंतिम समय तक यह जानकारी नहीं दी जाती कि उसका इंटरव्यू किस बोर्ड द्वारा लिया जाएगा. साथ ही बोर्ड के सदस्यों के सामने भी उम्मीदवार का नाम, जाति, जिला या प्रोफाइल जैसी व्यक्तिगत जानकारी नहीं रखी जाती.

इस व्यवस्था में केवल एक कोड नंबर के आधार पर अभ्यर्थी का इंटरव्यू लिया जाता है. इससे किसी भी तरह की सिफारिश, जान पहचान या बाहरी दबाव की संभावना लगभग खत्म हो जाती है. गुजरात में इस मॉडल को लागू करने के बाद इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर विवाद कम हुए और चयन प्रणाली पर अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ा. इसी अनुभव को आधार बनाकर अब बिहार लोक सेवा आयोग ने भी इसी तर्ज पर नई व्यवस्था लागू की है. गौरतलब है कि अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस व्यवस्था की तारीफ की थी और कहा था कि देश के अन्य राज्य भी इससे सिखते हुए इसे अपना सकते हैं.

इंटरव्यू बोर्ड लॉटरी से कैसे चुना जाएगा?

इसके लिए बीपीएससी कार्यालय में एक बॉक्स रखा गया है, जिसमें पर्चियां रखी गई हैं. अभ्यर्थी इंटरव्यू से ठीक पहले उस बॉक्स से एक पर्ची निकालते हैं और उसे स्क्रैच करने के बाद यह पता चलता है कि उनका साक्षात्कार किस बोर्ड के समक्ष होगा. खास बात यह है कि इंटरव्यू से लगभग 10 मिनट पहले तक न तो उम्मीदवार को यह जानकारी रहती है और न ही आयोग को कि किस अभ्यर्थी का इंटरव्यू कौन सा बोर्ड लेगा. इससे पहले से किसी भी तरह की योजना, पहचान या सिफारिश की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है.

इस तरह लॉटरी और कोड प्रणाली मिलकर इंटरव्यू प्रक्रिया को पूरी तरह रैंडम और निष्पक्ष बनाती है. बाद में इंटरव्यू बोर्ड की मार्किंग के आधार पर आयोग की टीम मिलान करेगी कि किस रोल नंबर को क्या कोड था और उस कोड को कितने अंक मिले. फिर इसके बाद अंतिम रिजल्ट तैयार होगा.

‘पारदर्शिता मजबूत करने के लिए यह कदम’

बीपीएससी के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है. उन्होंने कहा कि पहले भी कंप्यूटर के माध्यम से रैंडम तरीके से इंटरव्यू बोर्ड का चयन किया जाता था और उसमें भी पारदर्शिता बनी रहती थी, लेकिन उस प्रक्रिया में कहीं न कहीं मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश रहती थी.

शिक्षाविद बता रहे इस ऐतिहासिक सुधार कदम

सिविल सर्विसेज जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लोकप्रिय शिक्षाविद गुरु रहमान ने इसे आयोग की चयन प्रक्रिया में ऐतिहासिक सुधार वाला कदम बताया. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में आयोग ने अभ्यर्थियों की पहचान को भी पूरी तरह गोपनीय बना दिया है. इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर या व्यक्तिगत विवरण इंटरव्यू बोर्ड के सामने नहीं होगा और हर अभ्यर्थी को एक विशेष कोड नंबर दिया गया है. ऐसे में बोर्ड के सदस्य केवल उसी कोड नंबर के आधार पर इंटरव्यू लेंगे. इससे किसी भी तरह की व्यक्तिगत पहचान, सामाजिक पृष्ठभूमि या जान-पहचान का प्रभाव समाप्त हो जाएगा.

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