पटना: राजद बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल का बयान चर्चा में है. इससे महागठबंधन के भविष्य पर अब सवाल खड़े हो गए हैं. कांग्रेस आलाकमान की समीक्षा बैठक और उसके बाद उठी असंतोष की आवाज ने गठबंधन की नीव हिला दी. इस बीच कांग्रेस ने 1 दिसंबर को पटना के सदाकत आश्रम में बैठक बुलाई है. इसमें बिहार चुनाव में हार के तमाम बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी.

शनिवार की बैठक में नहीं पहुंचे कांग्रेस MLA
सोमवार से बिहार विधानसभा का सत्र भी शुरू होने वाला है. इसको लेकर शनिवार को महागठबंधन के विधायकों की बैठक बुलाई गई थी. तेजस्वी यादव के सरकारी आवास एक पोलो रोड पर महागठबंधन के घटक दलों की विधायकों की बैठक हुई. हालांकि बैठक में कांग्रेस के 6 में से 2 ही विधायक पहुंचे. इससे महागठबंधन में मनमुटाव की बात सामने आयी.
गठबंधन में मनमुटाव की खबर
गठबंधन में मनमुटाव की खबर के सवाल पर मंगनीलाल मंडल ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि ‘इस तरह की कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है. सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष चुना गया. कांग्रेस की ओर से विधान पार्षद समीर सिंह को प्रतिनिधि के रूप में भेजा गया था.‘ चार विधायकों की बैठक में शामिल नहीं होने के सवाल पर कहा कि सभी विधायक दिल्ली में हैं.

सोमवार को बैठक
सोमवार को पटना के सदाकत आश्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक है. पार्टी के सभी जिलाध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष के साथ फ्रंटल प्रमुख मोर्चा एवं संगठन के प्रमुखों को शामिल होने का निर्देश दिया गया है. बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम करेंगे. बैठक में आगामी 14 दिसंबर को वोट चोरी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन एवं रैली का आयोजन दिल्ली में होगा, जिसपर चर्चा होगी.

बैठक का उद्देश्य
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन का कहना है कि बैठक में पार्टी के जिलाध्यक्षों के साथ-साथ सभी अधिकारियों को बुलाया गया है. इसके अलावा कल की बैठक में विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर समीक्षा भी की जाएगी. इसके अलावे पार्टी की मजबूती एवं नीतियों एवं भविष्य में पार्टी के क्या-क्या कार्यक्रम है, उसको लेकर रूपरेखा तैयार होगी.

‘महागठबंधन एकजुट’
महागठबंधन के अंदर सब कुछ ठीक नहीं होने की चर्चा है. हालांकि राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद का दावा है कि महागठबंधन के अंदर ऑल इज वेल है. एजाज अहमद का कहना है कि कल महागठबंधन के विधायकों की बैठक हुई थी, जिसमें सभी विधायकों ने एकजुट होकर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में जनता के मुद्दे सड़क से सदन तक उठाने का निर्णय लिया है.
















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