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किशनगंज में नेपाल से आए हाथियों का आतंक, खेतों से लेकर घर तक मचा रहे उत्पात

18 दिनों के बाद नेपाल से भटककर आए जंगली हाथी बिहार के किशनगंज में उत्पात मचा रहे हैं। बीती रात एक बार फिर से दिघलबैंक प्रखंड के सीमावर्ती ईलाकों में हाथियों का झुंड प्रवेश कर गया और जमकर उत्पात मचाया। रविवार को मध्य रात्री के समय अठगछिया पंचायत के तलवारबंधा गांव के पास आये करीब 8 हाथियों के झुंड ने गांव के किसान मुबैर आलम, शफ़ीउर रहमान ,आज़ाद अंसारी एवं सज़ाबो उद्दीन के करीब एक एकड़ में लगे केले व मक्के कि फसल को बुरी तरह रौंद डाला। तलवारबंधा गांव से आगे बढ़ते हुए हाथियों ने निकटवर्ती बंदरझुला पंचायत ठाकुरगंज के डोरिया गांव कि एक मोसमात निशारून निशां के दो पक्के मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और मकान के अंदर रखे अनाज एवं अन्य समानों को नष्ट कर डाला। सुबह होने से पहले हाथियों का झुंड वापस नेपाल कि ओर लौट गया।इस वर्ष हाथियों के नेपाल के जंगलों से भटककर प्रखंड में आने कि यह तिसरी घटना है ।जबकि इस सीजन में हाथियों ने दिघलबैंक प्रखंड के सीमावर्ती ईलाकों में चौथी बार दस्तक दी है।इससे पहले हाथियों का झुंड 30 दिसंबर कि रात, 3 जनवरी कि रात तथा 22 जनवरी कि राथ भी प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में आ चुका है और इस दौरान हाथियों द्वारा आलू तथा मक्के के पौधों को भी नुकसान पहुंचाने के साथ साथ बम टोला सुरीभिट्ठा गांव में एक कच्चे मकान को भी क्षतिग्रस्त किया गया था।रविवार कि रात हाथियों के तलवारबंधा तथा डोरिया गांव में घुस आने की जानकारी देते हुए स्थानीय युवा इम्तियाज आलम ने बताया कि सीमा पार नेपाल क्षेत्र के घेराबाड़ी में लगातार डेरा डाले हुए करीब एक दर्जन हाथियों के झुंड में से 8 हाथी भटककर सीमा पार अचानक तलवारबंधा गांव में घुस आया।इस दौरान हाथियों ने जब तलवारबंधा गांव के अंदर प्रवेश करना चाहा तो भनक लगते हीं गांव के लोगों ने आग जलाकर तथा अन्य बचाव के संसाधनों को अपनाकर हाथियों के झुंड को गांव से दूर रखा। लेकिन हाथियों ने इस दौरान गांव के आसपास खेतों में लगे मक्के तथा केले कि फसलों को जमकर नुकसान पहुंचाया। तलवारबंधा से वापस लौटते हुए हाथियों ने पड़ोसी गांव डोरिया में एक विधवा महिला निशारून निशां के दो पक्का घरों पर धावा बोल दिया।ऐसे में घर के अंदर सोये लोगों ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई तथा किसी तरह हाथियों को घर और गांव से दूर भगाया लेकिन तबतक हाथियों ने निशारून के दो पक्के घरों को नष्ट कर घर में रखें अनाज को भी नष्ट कर डाला।

हाथियों के आने को लेकर वनों के क्षेत्र पदाधिकारी दिनेश कुमार ने कहा कि हाथियों के घुस आने एवं हाथियों द्वारा आवासीय मकान क्षति पहुँचाने की सूचना प्राप्त हुई है।जिसके बाद स्थानीय टीम को भेजा गया है और स्थानीय स्तर पर वॉलिंटियर्स को हाथियों को भागने के लिए आवश्यक सामग्री भी यथा शीघ्र उपलब्ध कराया जायेगा।जिससे किसी भी समय हाथियों कि आने कि सूचना पर लोगों कि मदद कि जा सके।

एकबार फिर से लगातार हाथियों के सीमावर्ती ईलाकों में आने कि घटना को लेकर सीमावर्ती लोग भयभीत हैं तथा किसानों के माथे पर चिंता कि लकीरें एक बार फिर से बढ़ गई है।किसान इस बात को लेकर विशेष चिंतित हैं कि कहीं पिछले कई वर्षों कि तरह एक बार फिर से इस वर्ष भी उनका मक्का का फसल हाथियों का ग्रास न बन जाय।क्योंकि पिछले करीब एक दशक से मक्के के सीजन में दिघलबैंक प्रखंड के सीमावर्ती ईलाकों में हर वर्ष हाथियों का झुंड मक्के के खेतों को अपना डेरा डाल लेते हैं और जमकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।

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