बिहार में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए BPSC TRE-4 भर्ती इस समय सबसे बड़ी उम्मीद बनी हुई है। करीब 32,388 शिक्षक पदों पर प्रस्तावित इस भर्ती को लेकर परीक्षा का शेड्यूल सामने आ चुका है और सितंबर में परीक्षा प्रस्तावित है।मामला सिर्फ विज्ञापन जारी होने तक सीमित नहीं है। भर्ती से पहले रिक्त पदों की अंतिम सूची, आरक्षण रोस्टर, शिक्षकों के ट्रांसफर-समायोजन और अभ्यर्थियों की पात्रता जैसे कई अहम काम अभी पूरे किए जाने हैं। ऐसे में परीक्षा कैलेंडर और जमीनी तैयारियों के बीच समय का अंतर लगातार कम होता जा रहा है।
TRE-4 की प्रस्तावित 32,388 रिक्तियां इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। हालांकि, शिक्षा विभाग स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक जरूरत और खाली पदों की दोबारा समीक्षा कर रहा है। इस प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका शिक्षकों के ट्रांसफर और समायोजन की है।दरअसल, कई स्कूलों में स्वीकृत पदों की तुलना में शिक्षक अधिक हैं, जबकि कुछ स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। विभाग अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। इसका सीधा असर TRE-4 की वैकेंसी पर पड़ सकता है।

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए। अगर किसी स्कूल में तीन शिक्षकों की कमी है और दूसरे स्कूल से एक शिक्षक का ट्रांसफर वहां कर दिया जाता है, तो उस स्कूल की रिक्ति घटकर दो रह जाएगी। वहीं, जिस स्कूल से शिक्षक हटकर गया, वहां एक पद खाली हो सकता है। यानी ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया के बाद स्कूलवार रिक्तियों का गणित बदल सकता है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग को ट्रांसफर और समायोजन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही रिक्तियों की अंतिम तस्वीर स्पष्ट करनी होगी।
TRE-4 की वैकेंसी में कुछ विषयों के पदों को शामिल किए जाने की चर्चा भी है। इनमें मैथिली, संगीत, अरबी, फारसी और उर्दू जैसे विषय शामिल हैं। अगर इन विषयों के पदों को अंतिम रिक्तियों में शामिल किया जाता है तो कुल वैकेंसी का आंकड़ा भी बदल सकता है। हालांकि अंतिम संख्या शिक्षा विभाग की ओर से रिक्तियों के सत्यापन और रोस्टर तैयार किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी। रिक्तियों को अंतिम रूप देने के बाद आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा और फिर पूरी सूची BPSC को भेजी जाएगी। इसके बाद ही TRE-4 का आधिकारिक विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।










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