बिहार में शरा’बबंदी को लेकर एनडीए के नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी शरा’बबंदी की समीक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने शराब’बंदी के पक्ष में जोरदार बयान देते हुए कहा कि इसे खत्म करने की मांग श’राब माफि’या और कुछ शरा’ब प्रेमी कर रहे हैं।
दिलीप जायसवाल ने कहा कि शरा’बबंदी हटाने के लिए श’राब मा’फिया और कुछ शरा’ब प्रेमी लोग बेहद बेचैन हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में सूखे न’शे (ड्र’ग्स) की लत को लेकर जो रिपोर्ट पेश की जा रही है, उसके आधार पर शरा’बबंदी पर सवाल उठाना गलत है।उन्होंने कहा कि बिहार पूरे देश में इस मामले में काफी नीचे है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम और सिक्किम जैसे राज्यों में 5 से 6 प्रतिशत आबादी सूखे न’शे की चपेट में है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 1 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि जहां श’राब खुलेआम बिक रही है, वहां बिहार की तुलना में कई गुना अधिक लोग न’शे का सेवन कर रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि यह कहना गलत है कि शरा’बबंदी के कारण लोग सूखे न’शे की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने आ’रोप लगाया कि इस तरह की बातें जनता को भ्रमित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए शरा’बबंदी खत्म करने की दलील देना उचित नहीं है।
दिलीप जायसवाल ने कहा, “पैसा कमाने के लिए क्या कोई कोठे पर चला जाएगा? श’राब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। समाज में नशा’मुक्ति और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। मानवता बेचकर कमाए गए पैसे से विकास संभव नहीं है।”
उन्होंने दो टूक कहा कि कुछ श’राब प्रेमी और शरा’ब माफि’या चाहते हैं कि बिहार में शरा’बबंदी खत्म हो जाए, लेकिन सरकार समाजहित में इस कानून के प्रति प्रतिबद्ध है।











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