सावन का महीना शुरू होते ही उत्तर बिहार की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बाबा गरीबनाथ धाम ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंज उठता है. मुजफ्फरपुर स्थित यह प्राचीन शिवधाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है. सावन में लाखों कांवरिये गंगाजल लेकर लंबी पैदल यात्रा के बाद यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.

मान्यता है कि यहां भगवान शिव गरीबनाथ धाम में अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं. सच्चे मन से आने वाले किसी भी भक्त को निराश नहीं लौटाते. लगभग 300 वर्ष पुराने इस मंदिर का इतिहास चमत्कार, लोकविश्वास और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है.
स्थानीय परंपराओं के अनुसार एक निर्धन शिवभक्त अपनी बेटी के विवाह को लेकर बेहद चिंतित था. आर्थिक तंगी के कारण उसके पास कोई उपाय नहीं बचा था. वह प्रतिदिन शिवलिंग के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करता था. एक रात मंदिर में प्रार्थना करते-करते उसे नींद आ गई. स्वप्न में भगवान शिव ने उसे आश्वस्त किया कि उसकी चिंता समाप्त हो जाएगी.

अगले दिन चमत्कार हुआ, जब वह घर पहुंचा तो विवाह के लिए आवश्यक सभी सामान पहले से मौजूद था. परिवार ने बताया कि कुछ समय पहले कोई व्यक्ति स्वयं यह सामान देकर गया था. भक्त ने इसे भगवान शिव की कृपा माना और भावुक होकर उन्हें ‘गरीबों के नाथ’ कहकर पुकारा. इसके बाद से यह शिवधाम बाबा गरीबनाथ के नाम से प्रसिद्ध हो गया. आज भी श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है.
मंदिर की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार लगभग तीन सौ वर्ष पहले यह पूरा इलाका घने जंगल से घिरा हुआ था. जंगल की सफाई के दौरान एक विशाल बरगद के पेड़ को काटा जा रहा था. तभी उसकी जड़ों से लाल रंग का द्रव निकलने लगा. इस घटना के बाद काम रोक दिया गया.उसी रात स्थानीय जमींदार परिवार के पूर्वजों को स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए. उन्हें उस स्थान की खुदाई कराने का निर्देश मिला. अगले दिन खुदाई में शिवलिंग प्राप्त हुआ और वहीं पूजा-अर्चना शुरू हुई. समय के साथ यहां मंदिर का निर्माण हुआ और यह उत्तर बिहार के प्रमुख शिवधाम के रूप में विकसित हो गया.












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