मुजफ्फरपुर जिले के झपहां इलाके से डिजिटल पेमेंट के नाम पर कथित ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। झपहां सीआरपीएफ कैंप, मढ़ौलिया रोड के पास स्थित शिवांश मोबाइल के संचालक दीपक कुमार ने इस मामले में अहियापुर थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित दीपक कुमार के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे एक युवक उनकी दुकान पर आया और एक मोबाइल पसंद करने के बाद भुगतान के लिए दुकान का क्यूआर कोड मांगा। युवक ने उनके बिजनेस अकाउंट में ₹20,000 ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। खाते में राशि आने के बाद दुकानदार को भरोसा हो गया कि ग्राहक वास्तव में मोबाइल खरीदने आया है।

दीपक कुमार का आरो’प है कि भुगतान के महज दो-तीन मिनट बाद युवक के पास एक फोन आया। इसके बाद उसने घर में इमरजेंसी होने की बात कहते हुए फिलहाल मोबाइल नहीं लेने की बात कही। उसने कहा कि वह अगले दिन आकर मोबाइल ले जाएगा, लेकिन अभी उसे अपने ₹20,000 वापस चाहिए। दुकानदार ने उसे समझाने की कोशिश की कि यदि वह मोबाइल लेने ही वाला है तो पैसे वापस लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन युवक लगातार नकद राशि लौटाने की मांग करता रहा। उसकी बातों पर भरोसा करते हुए दुकानदार ने अपने गल्ले से ₹20,000 नकद उसे दे दिए, जिसके बाद वह वहां से चला गया।
पी’ड़ित के अनुसार, उसी दिन दोपहर करीब 2:30 से 3:00 बजे एक अज्ञात नंबर से उनके पास फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि जिस खाते से ₹20,000 ट्रांसफर किए गए थे, वह फ्रॉ’ड का पैसा था और यह राशि उसके खाते से धो’खाधड़ी के जरिए भेजी गई थी। उसने यह भी कहा कि वह इस मामले की शिकायत साइबर क्रा’इम सेल में करने जा रहा है।

यह सुनकर दुकानदार पूरी तरह हैरान रह गया। उसने फोन करने वाले को पूरी घटना बताते हुए कहा कि एक युवक ग्राहक बनकर आया था, जिसने पहले ऑनलाइन भुगतान किया और फिर इमरजेंसी का बहाना बनाकर वही रकम नकद वापस ले ली। दीपक कुमार का कहना है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, क्योंकि उन्होंने ग्राहक की बात पर भरोसा करते हुए नकद राशि वापस की थी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके पास इसका कोई सबूत है, तो उन्होंने बताया कि उनकी दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में आरो’पी के दुकान पर आने, नकद पैसे लेने और पैसे गिनने तक की पूरी घ’टना रिकॉर्ड है।
पीड़ि’त ने पुलिस से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, आरो’पी की पहचान कर उसे गिरफ्ता’र किया जाए तथा उन्हें उनकी ठ’गी गई राशि वापस दिलाई जाए। फिलहाल इस पूरे मामले में दीपक कुमार ने अहियापुर थाने में लिखित आवेदन दे दिया है। पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई में जुटी है। यह घट’ना सभी दुकानदारों और आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी है। यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन भुगतान करने के तुरंत बाद किसी बहाने से वही रकम नकद वापस मांगता है, तो बिना पूरी जांच और भुगतान की पुष्टि किए नकद राशि वापस न करें। ऐसी स्थिति में पहले संबंधित बैंक, भुगतान प्लेटफॉर्म या पुलिस से सत्यापन करना अधिक सुरक्षित होगा।










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