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मुजफ्फरपुर में मिड-डे मील की खुली पोल, ‘200 बच्चों के लिए मिलता है सिर्फ 750 ग्राम दाल’, रसोइयों ने मास्टर साहब के ‘काले खेल’ को किया उजागर

मुजफ्फरपुर : बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के पोषण के लिए चलाई जा रही मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) योजना में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक सनसनीखेज मामला मुजफ्फरपुर जिले से सामने आया है। आम तौर पर इस योजना पर मीडिया या जनता सवाल उठाती है, लेकिन इस बार खाना बनाने वाली रसोइयों ने ही स्कूल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रसोइयों के इस खुलासे ने शिक्षा विभाग और स्कूल के ‘मास्टर साहब’ की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो जिले के कटरा प्रखंड अंतर्गत चंगेल पंचायत के डुमरी मध्य विद्यालय का बताया जा रहा है। वीडियो में तीन महिला रसोइयां एक साथ खड़ी होकर अपनी व्यथा सुना रही हैं और स्कूल के प्रधान शिक्षक पर राशन की चोरी का सीधा आरोप लगा रही हैं।

उनका कहना है कि स्कूल में रोजाना 150 से 200 बच्चे आते हैं, लेकिन उनके भोजन के लिए केवल 750 ग्राम से 1 किलो तक दाल दी जाती है। मसाला भी डब्बे से नापकर इतनी कम मात्रा में दिया जाता है कि भोजन का स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखना नामुमकिन है।

रसोइयों ने भावुक होते हुए सवाल उठाया कि इतने कम सामान में आखिर वे इतने बच्चों का पेट कैसे भरें? सरकार द्वारा तय मेनू कार्ड के अनुसार बच्चों को पौष्टिक भोजन, अंडा और फल देने का प्रावधान है, जिसके लिए लाखों रुपये का बजट आवंटित होता है। लेकिन धरातल पर बच्चों को भोजन के नाम पर केवल ‘खानापूर्ति’ परोसी जा रही है। रसोइयों का यह बयान साबित करता है कि सरकारी फाइलों में चमकने वाली यह योजना जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है और मासूम बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

अबतक जब भी मीडिया या आम लोग भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते थे, तो अक्सर विभागीय अधिकारी जांच के नाम पर मामले को दबा देते थे। लेकिन अब जब स्कूल के चूल्हे-चौके से जुड़ी महिलाओं ने ही लूट-खसोट के इस ‘काले कारोबार’ को जगजाहिर कर दिया है, तो प्रशासन के लिए इसे अनदेखा करना मुश्किल होगा। रसोइयों का आरोप है कि बच्चों के हक का राशन बीच में ही गायब कर दिया जाता है, जिससे स्पष्ट है कि इस खेल में ऊपर से नीचे तक की मिलीभगत हो सकती है।

अब क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि क्या इन ‘बड़े साहबों’ की नींद टूटेगी? क्या रसोइयों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद संबंधित हेडमास्टर पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर हर बार की तरह जांच की फाइलें धूल फांकती रहेंगी? ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों को पद से हटाया जाए ताकि भविष्य में गरीब बच्चों के निवाले पर कोई डाका न डाल सके।

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