रोहतास : रोहतास जिले की कैमूर पहाड़ी स्थित ऐतिहासिक रोहतासगढ़ किला और प्रसिद्ध रोहितेश्वर धाम तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुगम पहुंच के लिए करोड़ों की लागत से बन रहा बहुप्रतीक्षित रोहतासगढ़ रोपवे का टावर ट्रायल के महज एक सप्ताह के भीतर शुक्रवार को गिर गया।

अब इस मामले की जांच के लिए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति को जांच रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर देने का निर्देश दिया गया है। इस घटना के कारण अपर टर्मिनल स्टेशन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। हालांकि, किसी भी प्रकार का जान-माल की क्षति नहीं हुई है।

बताया जाता है कि रोपवे निर्माण कार्य अंतिम चरण में था। इसी बीच मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को लेकर प्रशासनिक दबाव में जल्दबाजी में ट्रायल कराया गया। ट्रायल को सफल बताते हुए मार्च तक आमलोगों के लिए आवाजाही शुरू होने की संभावना थी। लेकिन, कुछ दिनों बाद ही टावर धंसने से परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार को रोपवे पर सामान लोड कर ट्रायल किया जा रहा था। तभी मेन टावर गिर पड़ा।

बताते चलें कि बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा कोलकाता की रोपवे एंड रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को निर्माण की जिम्मेवारी दी गई थी। 2020 में सर्वे का कार्य पूरा किया गया था। परियोजना की अनुमानित लागत 12 करोड़ 65 लाख आंकी गई थी। इसके बाद निर्माण एजेंसी द्वारा 21 फरवरी 2020 को कार्य प्रारंभ किया गया था। परियोजना को 14 माह बाद यानी 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन, एजेंसी द्वारा लगातार निर्माण कार्य में देरी से इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते रहे।

तत्कालीन डीएम नवीन कुमार ने स्थल का निरीक्षण कर जुलाई 2023 तक कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी कई बार समय सीमा बढ़ाई गई। पुल निर्माण निगम के सहायक अभियंता कौशलेन्द्र कुमार ने बताया कि ट्रायल दौरान रोपवे का चैन उतरने से तकनीकी खराबी आई है। जिसे दुरूस्त कराया जाएगा। इसके लिए कोलकाता से इंजीनियरों को बुलाया गया है।














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