पूर्वी चंपारण: तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया-केसरिया मार्ग पर बन रहे विराट रामायण मंदिर के लिए विश्व का सबसे बड़ा एकाश्म ग्रेनाइट शिवलिंग शुक्रवार 21 नवंबर को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद रवाना हो गया. यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी है.
विश्व का सबसे बड़ा रामायण मंदिर
महावीर मंदिर न्यास (पटना) द्वारा बनाया जा रहा विराट रामायण मंदिर आकार में 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा. इसमें 22 मंदिर, 18 शिखर और 270 फीट ऊंचा मुख्य शिखर होगा. दीवारों पर रामायण के प्रसंग उकेरे जाएंगे.
निर्माण कार्य तेजी पर
मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, गर्भगृह की पाइलिंग आदि का काम पूरा हो चुका है. अब विशाल शिवलिंग की स्थापना के बाद मुख्य मंदिर का निर्माण और तेज होगा.
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दस साल की साधना का फल
महाबलीपुरम के निकट पट्टीकाडु क्षेत्र में एक ही विशाल ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया यह शिवलिंग पिछले दस वर्षों की अथक मेहनत का परिणाम है. शिल्पकारों ने सूक्ष्म नक्काशी, संतुलन और सौंदर्य पर विशेष ध्यान देते हुए इसे तैयार किया. अनुमानित लागत करीब तीन करोड़ रुपये आई है.
96 चक्कों वाले विशेष ट्रक पर सवार
इतने भारी वजन को देखते हुए शिवलिंग को 96 चक्कों वाले हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लोड किया गया है. विशेष इंजीनियरिंग टीम की निगरानी में यह धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। पूरी यात्रा में 20-25 दिन लगने की संभावना है.

रास्ते में बनेगा आस्था का महायज्ञ
महाबलीपुरम से चकिया तक के पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत की तैयारी है. कई शहरों में शोभायात्रा, पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए विशेष मंच बनाए जा रहे हैं. जगह-जगह ट्रक रुकेगा और पुजारी मंडली विधिवत पूजन करेगी.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
स्थानीय प्रशासन, पुलिस और महावीर मंदिर न्यास समिति मिलकर रूट प्लानिंग, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ प्रबंधन कर रहे हैं. हर पड़ाव पर बैरिकेडिंग होगी ताकि श्रद्धालु सुरक्षित दर्शन कर सकें. इंजीनियरों की टीम हर किलोमीटर पर तकनीकी जांच कर रही है.













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