सिवान: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने सिवान जिले के रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया. यहां से उनके बेटे ओसामा शहाब राजद के उम्मीदवार हैं. हिना ने अपना वोट डाला और मतदाताओं को प्रेरित करते हुए दावा किया कि ‘हमारी सरकार बन रही है’. शहाबुद्दीन परिवार लंबे समय से सिवान की राजनीति में प्रभावशाली रही है.

हिना शहाब 2009 में सिवान लोकसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रह चुकी हैं, आज सुबह सिवान के मतदान केंद्र पर पहुंचीं. उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर मतदान किया और पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हमारी सरकार बन रही है. बिहार की जनता ने विकास और स्थिरता के लिए फैसला ले लिया है.” सिवान क्षेत्र, जो शहाबुद्दीन के राजनीतिक गढ़ के रूप में जाना जाता है, इस चुनाव में भी NDA और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है.

रघुनाथपुर विधानसभा सीट (सिवान जिला) पर 2025 बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मोहम्मद शहाबुद्दीन के 31 वर्षीय बेटे ओसामा शहाब को उम्मीदवार बनाया है, जो लंदन से लॉ की पढ़ाई कर चुके हैं और सोशल वर्कर के रूप में अपनी एफिडेविट में दर्ज हैं. शहाबुद्दीन की ‘बहुबली’ विरासत को भुनाने की कोशिश में राजद ने मौजूदा विधायक हरिशंकर यादव को टिकट न देकर ओसामा को मौका दिया, जो महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-विपक्षी दल) के लिए मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक को एकजुट करने का दांव है.
राजनीतिक समीकरण में यह सीट त्रिकोणीय मुकाबला वाली है, जहां एनडीए (जदयू) की ओर से विकास कुमार सिंह, जन सुराज पार्टी से राहुल किर्ति और अन्य निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं; 2020 में राजद ने 11.64% मार्जिन से जीत हासिल की थी, लेकिन एनडीए ‘माफिया राज’ लौटने का आरोप लगाकर ऊपरी जातियों, ईबीसी और दलित वोटों पर निशाना साध रहा है, जबकि ओसामा का चुप्पा रहना और परिवार का पुराना प्रभाव इस हाई-प्रोफाइल सीट को ‘डायनेस्टी बनाम विकास’ की जंग बना रहा है, जहां पहले चरण के 6 नवंबर के मतदान से परिणाम तय होंगे.

सिवान की सियासत में शहाब परिवार का पुराना दबदबा
हिना शहाब का राजनीतिक सफर उनके पति मोहम्मद शहाबुद्दीन से जुड़ा रहा है, जो 1990 के दशक में सिवान से चार बार सांसद चुने गए थे. 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने हिना को रघुनाथपुर सीट से टिकट देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और अपने करीबी हरिशंकर यादव को समर्थन दिया. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सिवान से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, जो उनके पति के सिद्धांतों पर आधारित थी.










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