मुजफ्फरपुर: आरडीएस कॉलेज स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर “गांधी के विचारों की प्रासंगिकता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गांधी जी को याद करते हुए शिक्षक, छात्र एवं कर्मचारियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए विभागाध्यक्षा डॉ कहकशां ने कहा कि गांधी के विचारों ने दुनिया भर के लोगों को न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि करुणा और शांति के दृष्टिकोण से भारत व दुनिया को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांधी के विचार तत्कालीन समय में जितने प्रासंगिक थे, उससे कई गुना ज्यादा वर्तमान में प्रासंगिक हैं। गांधी का दर्शन हमारे जीवन में बहुत कुछ सीखने के लिए प्रेरित करता है।
मुख्य वक्ता डॉ एमएन रिजवी ने कहा कि गांधी ‘सर्वधर्म समभाव’ की भावना से प्रेरित थे जो कि आधुनिक युग में वैश्विक सद्भावना का वातावरण बनाए रखने और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार को साकार करने के लिए बेहद जरूरी है। गांधी की सत्य की अवधारणा ने पूरे मानव जाति को प्रभावित किया है। उन्होंने अहिंसा को अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल करके आजादी के महत्वपूर्ण आंदोलनों को सफल बनाया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ अमिता शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, बल्कि विचारधारा हैं। स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन तक का आंदोलन बनाने के लिए उन्होंने इसे ‘राम राज्य’ से जोड़ा। ‘राम राज्य’ की कल्पना ने ही लोक राज्य की अवधारणा को मजबूत किया। गांधी के मुंह से निकले अंतिम शब्द ‘हे राम’ ने भारतीय संस्कृति एवं भाईचारे को मजबूती दी। गांधी के राम अभय की अमोघ शक्ति हैं।
पार्ट वन द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा अन्नु ने कहा कि गांधी जी युवाओं को संदेश देते हैं कि हमें अपने जीवन का आधार ईमानदारी और सत्य निष्ठा पर केंद्रित रखना चाहिए। गांधी की लिखी पुस्तकें हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है। मौके पर इतिहास विभागाध्यक्षा डॉ कहकशां, डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ एमएन रिजवी, डॉ अनुपम कुमार, डॉ अजमत अली, डॉ ललित किशोर, डॉ मनीष कुमार शर्मा समेत छात्र-छात्राएं एवं कर्मचारी मौजूद थे। वहीं कार्यक्रम का संचालन डॉ अजमत अली एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ ललित किशोर ने किया।
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