मुजफ्फरपुर: देश में 12 ज्योतिर्लिंगों से अलग, एक ऐसा भी शिवमंदिर है, जहां शिवलिंग के साथ पक्षीराज गरुड़ की भी पूजा रामायणकाल से होती चली आ रही है। मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के मुतलुपुर गांव में स्थापित इस मंदिर का नाम है खगेश्वरनाथ मंदिर।

पूरी दुनिया मे शिव मंदिरों के सामने नंदी की प्रतिमा अनिवार्य रूप से होती है, पर यहां एक तरफ नंदी हैं, तो दूसरी तरफ गरुड़ विराजमान हैं। इस मंदिर के शिवलिंग पर चढ़ने वाला जल गरुड़ की प्रतिमा पर ही गिरता है। ऐसा कहा जाता है कि दुर्लभ लाल पत्थर के शिवलिंग वाले इस मंदिर के पाये में पारस पत्थर जड़ा हुआ है। इस मंदिर की महिमा जानकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (तब राज्यपाल थे) यहां आ चुके हैं। श्रावणी मेला शुरू हो जाने के बाद यहां दिन भर भक्तों का तांता लगा रहता है।

रामायणकाल में विश्वकर्मा ने बनाई मंदिर
मंदिर के प्रधान पुजारी राजन झा बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण मानव ने नहीं, रामायणकाल में स्वयं विश्वकर्मा ने की है। बताया जाता है कि लक्ष्मण को जब नाग पास में बांध लिया गया तो गरुड़ को गुमान हो गया। वे सोचने लगे कि एक साधारण मानव नागपास में बंधा मौत से जूझ रहा है, भला वह शेषनाग का अवतार कैसे हो सकता है। स्वयं शिव ने गरुड़ का मार्गदर्शन किया। इस दौरान शिव ने रामावतार का रहस्य भी गरुड़ को बताया। गरुड़ सच जानने के बाद ग्लानि से भर उठे। कहते हैं तभी से शिवलिंग से थोड़ी दूर हटकर गरुड़ स्थापित हो गए। आश्चर्य की बात है कि मंदिर किसने बनवाया यह कोई नहीं जानता, पर भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसका अध्ययन कर बताया है कि मंदिर कम से कम पांच सौ साल पुराना है और शिवलिंग व गरुड़ प्रतिमा महाभारत काल के पहले के हैं।

मनोकामना होती पूरी, भक्त करते विशेष अनुष्ठान
प्रधान पुजारी बताते हैं कि यह मंदिर इच्छित फल देने वाला है। यहां भक्तों की मनोकामना जरूर पूरी होती है। राज्यपाल रामनाथ कोविंद यहां दर्शन करने आये और 10 दिन के भीतर राष्ट्रपति चुन लिए गए। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं
पर्यटन विभाग करा रहा जीर्णोद्धार
मुतलुपुर स्थित यह मंदिर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अधीन है। पूर्व कुलपति गोपाल जी त्रिवेदी इसके संरक्षक हैं। मंदिर के कई एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को हाल ही में हटाया गया है, और पर्यटन विभाग इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करा रहा है। मंदिर की ख्याति ऐसी है कि उत्तर और दक्षिणी बिहार के अलावा नेपाल तक से भक्त इसके दर्शन करने आते हैं। यहां साल में दो बार भव्य मेला लगता है।















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