मुजफ्फरपुर: मीठनपुरा स्थित बिहार सरकार के रामचंद्र शाही संग्रहालय में संग्रहालय के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष सुजीत कुमार तिवारी से शिष्टाचार मुलाकात की गई। इस अवसर पर रामचंद्र शाही संग्रहालय की सलाहकार समिति के सदस्य एवं समाजसेवी शंभु मोहन प्रसाद के नेतृत्व में सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक एवं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार तथा शांति सेना के संयोजक सोनू सरकार उपस्थित रहे।

मुलाकात के दौरान संग्रहालय की विरासत, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा लोककला और लोकसंस्कृति के संवर्धन पर विस्तृत चर्चा हुई। सहायक संग्रहालयाध्यक्ष सुजीत कुमार तिवारी ने कहा कि रामचंद्र शाही संग्रहालय मुजफ्फरपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर केवल अपनी विश्वप्रसिद्ध शाही लीची के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और लहठी शिल्प के कारण भी देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान रखता है। इन धरोहरों का संरक्षण और प्रचार-प्रसार समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर समाजसेवी एवं संग्रहालय सलाहकार समिति के सदस्य शंभु मोहन प्रसाद ने सुजीत कुमार तिवारी को अंगवस्त्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया। वहीं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने अपनी चर्चित पुस्तक “लीचीया लाले लाल” (लीची लोकगीत संग्रह) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। सुनील कुमार ने बताया कि “लीचीया लाले लाल” पुस्तक का प्रकाशन शाही लीची की मिठास और “मीठा मुस्कुराने” के संदेश को लोकसंगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकगीत किसी भी क्षेत्र की आत्मा होते हैं। इनमें जनजीवन की खुशियाँ, संवेदनाएँ, संस्कृति और परंपराएँ जीवंत रहती हैं।
समाजसेवी सोनू सरकार ने बताया कि लोकसंगीत समाज की स्मृतियों को संजोने तथा लोगों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। लोकगीत कभी समाप्त नहीं होते, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होकर समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखते हैं। मुजफ्फरपुर की पहचान शाही लीची की मिठास के साथ-साथ यहाँ की समृद्ध कला, संस्कृति और सृजनात्मक परंपरा से है। मुजफ्फरपुर की सांस्कृतिक पहचान और लोकजीवन को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करने हेतु रामचंद्र शाही संग्रहालय को विकसित करने की जरूरत हैं.
बैठक में लोककला, लोकसंगीत, कठपुतली कला तथा संग्रहालय के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के लिए भविष्य में संयुक्त रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।










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