बिहार की राजनीति में रविवार का दिन जेडीयू के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पहली बार नीतीश कुमार पार्टी की राज्य परिषद और राष्ट्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक राजधानी पटना स्थित जेडीयू प्रदेश मुख्यालय के कर्पूरी सभागार में आयोजित होगी।
इस बैठक को पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाली अहम बैठक माना जा रहा है। इसमें संगठन को मजबूत करने, नए विस्तार की योजना बनाने और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। पार्टी के देशभर से करीब 700 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
नीतीश कुमार अब इस बैठक में मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में शामिल होंगे। इससे पहले जब भी वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, उनके पास मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी रही थी। इस बार उनकी भूमिका पूरी तरह संगठन और पार्टी की रणनीति पर केंद्रित होगी। जेडीयू नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक अनुभव और उनका नेतृत्व पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। बैठक में संगठन को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है।
बैठक में जेडीयू के संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पार्टी की नीतियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर मंथन होगा। पार्टी नेताओं के अनुसार सामाजिक न्याय, सुशासन और विकास के मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए नया रोडमैप तैयार किया जा सकता है।











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