बिहार की राजनीति में बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव दिल्ली से पटना लौटने के एक दिन बाद राजधानी की सड़कों पर बिना किसी सुरक्षा घेरे के नजर आए। उनका वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बिहार की राजनीति के सबसे बड़े नेताओं में शामिल लालू यादव बिना सुरक्षा के सड़क पर क्यों दिखाई दिए?
दरअसल, हाल ही में बिहार सरकार द्वारा लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में कटौती किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। सुरक्षा कम किए जाने से नाराज लालू परिवार ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था को ही वापस लौटा दिया। राजद की ओर से इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित फैसला बताया गया था, जबकि सरकार की तरफ से इसे सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया नियमित प्रशासनिक निर्णय बताया गया।

इसी विवाद के बीच अब लालू यादव का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में लालू प्रसाद यादव पटना की सड़कों पर एक वाहन में सफर करते दिखाई दे रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उनके आगे-पीछे न तो पुलिस की गाड़ियां दिखाई दीं और न ही कोई सुरक्षा कर्मी नजर आया। आम दिनों में बड़े नेताओं के काफिलों के साथ चलने वाली सुरक्षा व्यवस्था इस बार पूरी तरह गायब दिखी।

वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोग इसे सरकार के फैसले के खिलाफ लालू परिवार का एक राजनीतिक संदेश मान रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सुरक्षा लौटाने के बाद लालू यादव का इस तरह सार्वजनिक रूप से बिना सुरक्षा के दिखाई देना महज संयोग नहीं माना जा सकता। इससे यह संदेश देने की कोशिश भी हो सकती है कि सरकार ने उनकी सुरक्षा कम कर राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति की है।

राजद समर्थकों का कहना है कि लालू यादव हमेशा जनता के नेता रहे हैं और उन्हें जनता के बीच रहने के लिए किसी बड़े सुरक्षा घेरे की जरूरत नहीं है। समर्थकों का दावा है कि लालू आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं और जनता ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। वहीं विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक सहानुभूति हासिल करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।











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