बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनके 12 वर्ष के कार्यकाल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है और राज्य आज विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सम्राट चौधरी ने अपने पत्र में बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि ज्ञान, शिक्षा और मोक्ष की धरती रही है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी बिहार में चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना की थी और आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार किया था। नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय विश्वभर में शिक्षा के प्रमुख केंद्र रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से नालंदा विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना संभव हुई और वर्ष 2024 में नए परिसर का उद्घाटन बिहार के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने वाला कदम साबित हुआ।
उपमुख्यमंत्री ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण और जननायक कर्पूरी ठाकुर के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने से पिछड़े और वंचित वर्गों में सकारात्मक संदेश गया है।

पत्र में सम्राट चौधरी ने बिहार को केंद्र सरकार से मिले आर्थिक सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में घोषित 1.25 लाख करोड़ रुपये के विशेष पैकेज ने राज्य के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। वर्तमान में राज्य के बजट में केंद्र की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। सड़क, उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यटन, बाढ़ नियंत्रण, मखाना बोर्ड और नए एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं के लिए भी केंद्र से विशेष सहायता मिल रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार में बड़े पैमाने पर सड़क और पुल परियोजनाओं का विकास हुआ है। कोसी महासेतु के निर्माण से वर्षों से अलग पड़े मिथिलांचल के दो हिस्से फिर से जुड़ गए। गांधी सेतु के जीर्णोद्धार, मोकामा में नए छह लेन पुल, मुंगेर में श्रीकृष्ण सेतु और भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के समानांतर नए पुल जैसी परियोजनाएं राज्य की तस्वीर बदल रही हैं। इसके अलावा बिहार को पहली बार पांच एक्सप्रेस-वे की सौगात मिली है।











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