मुजफ्फरपुर : देश में स्वच्छ पानी पीने का अधिकार ‘मौलिक अधिकार’ की श्रेणी में आता है. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत मान्यता दी है. इसके बावजूद मुजफ्फरपुर नगर निगम पिछले 18 दिनों से वार्ड 42 में गंदा और बदबूदार पानी नल से सप्लाई कर रहा है. नल खोलते ही गंदा पानी निकलने लगता है. लोगों ने इसकी शिकायत मेयर पति तक पहुंचा दी है लेकिन फिर भी नल से गंदा पानी आता ही जा रहा है.

गंदा और बदबूदार पानी की सप्लाई से लोग परेशान
मुजफ्फरपुर जिले के वार्ड संख्या 42 में कालीबाड़ी रोड इलाके में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है. पिछले कई दिनों से घरों में लगे नलों से गंदा और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिससे इलाके के लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि नल का पानी पूरी तरह से पीने योग्य नहीं है. इससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. मजबूरी में लोग बाहर से पानी लाने या बोतलबंद पानी खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं.

गंदे पानी से लगभग 3000 लोग प्रभावित
स्थानीय निवासी योगेश कुमार टिंकू ने बताया कि आज इस समस्या को लगभग 18वां दिन हो गया है. उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर मुज़फ्फरपुर शहर की मेयर के पति से भी बात की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. उनके अनुसार, कालीबाड़ी रोड इलाके में लगातार नल से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है, जो बिल्कुल भी पीने लायक नहीं है. इस समस्या से वार्ड 42 के करीब तीन हजार से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं. लोग मजबूरी में पानी खरीदकर पी रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों के लोग दूसरे इलाकों से पानी लाकर पीने को विवश हैं.

घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी
वहीं, स्थानीय निवासी अवधेश भगत ने बताया कि नल से निकलने वाला पानी न केवल गंदा है बल्कि उसमें से दुर्गंध भी आ रही है. उन्होंने कहा कि पीने के साथ-साथ खाना बनाने के लिए भी उन्हें पानी खरीदना पड़ रहा है. अवधेश भगत के अनुसार, यह समस्या दिसंबर महीने से ही बनी हुई है, लेकिन अब तक इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि जानकारी मिली है कि इलाके में सबमर्सिबल का पाइप फट गया है, जिसकी वजह से गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिलकर नलों तक पहुंच रहा है.

‘पीना छोड़िए पानी से नहाने में भी दिक्कत’
इसी तरह सुधा देवी ने बताया कि पिछले 15 दिनों से अधिक समय से नल से गंदा पानी आ रहा है. उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम में शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो सका है.

गंभीर बीमारी का बढ़ा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इलाके में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है. लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि पाइपलाइन की तत्काल जांच कर मरम्मत की जाए और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति बहाल की जाए. अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस गंभीर पेयजल संकट को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं.

क्या कहती हैं मेयर निर्मला साहू
निर्मला साहू ने माना कि कुछ इलाकों में गंदा पानी सप्लाई हो रहा है लेकिन ये पाइपलाइन के टूट जाने के कारण हुआ है. जल्द ही विभाग को मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं. तब तक इलाके में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था करने का दावा किया गया है.

गंदे पानी सप्लाई का दुष्परिणाम खतरनाक
फिलहाल, वार्ड 42 के लोग गंदे पानी और बढ़ती परेशानियों के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं. सदर अस्पताल के डॉक्टर विकास कुमार ने बताया कि गंदा पानी पीने और नहाने से स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं. दूषित पानी पीने से डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पीलिया, पेचिश और फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसमें मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी पेट व आंतों को संक्रमित कर सकते हैं, जिससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी होती है. लंबे समय तक गंदा पानी पीने से किडनी, लीवर और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर पड़ सकता है.
शुद्ध पानी मौलिक अधिकार
वहीं गंदे पानी से नहाने पर त्वचा संबंधी रोग होने की आशंका रहती है. इससे खुजली, दाने, फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, आंखों में जलन और बालों की समस्याएं हो सकती हैं. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए यह अधिक खतरनाक साबित होता है. इसलिए साफ और शुद्ध पानी का उपयोग बेहद जरूरी है. पानी उबालकर, फिल्टर लगाकर या सुरक्षित स्रोत से ही पीना चाहिए, ताकि गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके. वैसे भी शुद्ध पानी लोगों का मौलिक अधिकार है.













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