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पटना में 4.5 एकड़ में तैयार हो रहा श्मशान घाट, खर्च हो रहे हैं 89.40 करोड़, जानें खासियत

पटना : बिहार की राजधानी पटना अब अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस श्मशान घाट का गवाह बनने जा रही है. बांस घाट के पारंपरिक श्मशान स्थल को पूरी तरह नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है. यह राज्य का पहला मॉडर्न श्मशान घाट होगा, जहां एक ही जगह धार्मिक मान्यताओं, आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलेगा.

Bihar's first modern crematorium in patna bans Ghat | बिहार का पहला मॉडर्न श्मशान  घाट: पटना में दो तालाबों के बीच शिव प्रतिमा, मोक्ष-बैकुंठ द्वार ले रहा  आकार; कांसे ...

89.40 करोड़ से हो रहा तैयार

पटना स्मार्ट सिटी और बुडको मिलकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार कर रहे हैं, जिस पर लगभग 89.40 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इस नए श्मशान घाट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया श्रद्धा, शांति और आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ पूरी की जा सके. लोगों की सुविधा, शहर की बढ़ती जनसंख्या और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए इसे एक मॉडल परियोजना के रूप में तैयार किया जा रहा है.

मोक्ष और बैकुंठ द्वार आकर्षण का केंद्र

नए श्मशान घाट का सबसे बड़ा आकर्षण दो भव्य प्रवेश द्वार होंगे, जिन्हें मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार नाम दिया गया है. दोनों द्वारों का निर्माण तेजी से जारी है और कारीगर दिन-रात काम में जुटे हुए हैं. द्वारों को आधुनिक तकनीक और आस्था के आधार पर तैयार किया जा रहा है. दोनों की ऊंचाई करीब 46.58 फीट रखी गई है जबकि चौड़ाई लगभग 55 फीट होगी. मजबूत संरचना के साथ फ्रेश लोहे का उपयोग कर इन द्वारों की मजबूती सुनिश्चित की गई है.

द्वार पर कांसे का ॐ का प्रतीक

इन द्वारों के केंद्र में कांसे से निर्मित ओम (ॐ) का प्रतीक चिन्ह स्थापित किया जाएगा, जो इस स्थान की आध्यात्मिक पहचान को और अधिक उजागर करेगा. यह पूरी परियोजना पटना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत तैयार की जा रही है जिसे बुडको द्वारा निर्माण किया जा रहा है. यहां एक छोर से दूसरे छोर जाने के लिए रोड की स्मार्ट कनेक्टिविटी भी है. पूरे परिसर में जीवन की शुरुआत से जीवन के अंत तक के यात्रा का वर्णन है.

20 फीट ऊंची शिव प्रतिमा

श्मशान घाट परिसर के मध्य भाग में दो तालाबों के बीच भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है. यह प्रतिमा करीब 20 फीट ऊंची है. इसे तमिलनाडु के आदियोगी प्रतिमा की तर्ज पर तैयार किया गया है. इस प्रतिमा को विशेष फाइबर सामग्री से बनाया गया है ताकि यह मौसम के प्रभाव से सुरक्षित रह सके. जालंधर से आए कारीगरों की टीम ने इसे बारीक आकर्षक डिजाइन के साथ निर्मित किया है. शिव की प्रतिमा में 25 फीट की लंबाई का त्रिशूल भी लगाया गया है जो इस स्वरूप को और दिव्य रूप दे रहा है.

परिसर में शिव की प्रतिमा का सबसे अनोखा आकर्षण है इसकी जटाओं से बहने वाला कृत्रिम जल प्रवाह. ऐसा दृश्य तैयार किया जा रहा है कि मानो भगवान शिव के जटाजूट से गंगा की धारा प्रवाहित हो रही हो. शाम ढ़लते ही इस हिस्से में आकर्षक लाइटिंग जलकर वातावरण को दिव्यता से भर देगी. मरीन ड्राइव से गुजरने वाले लोगों को भी दूर से शिव की जटा से निकलते हुए पानी का दीदार होगा.

चार इलेक्ट्रिक क्रीमेशन ओवन

स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां चार इलेक्ट्रिक क्रीमेशन ओवन लगाए जा चुके हैं. इसमें एक पूरी तरीके से विद्युत शवदाह गृह है जबकि तीन विद्युत के साथ-साथ लकड़ी आधारित शवदाह केंद्र है. सभी चार सेंटर पर काफी ऊंचे चिमनी लगाए गए हैं. तकनीक आधारित यह प्रणाली समय की भी बचत करेगी और धुएं के प्रदूषण से आसपास के क्षेत्र को बचाएगी. हालांकि इन सब के अलावा जो लोग लकड़ी पर ही अंतिम संस्कार करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह सुविधा भी होगी. यहां लकड़ी पर भी अंतिम संस्कार होगा. पटना स्मार्ट सिटी से जुड़े अधिकारियों की मानें तो अगले तीन से चार महीने में यह तैयार हो जाएगा.

पहले से तीन गुना बड़े क्षेत्र में फैला नया श्मशान

पटना के प्रमंडलीय आयुक्त सह बुडको के प्रबंध निदेशक अनिमेष पराशर ने बताया कि अब तक बांस घाट सिर्फ 1.24 एकड़ में सीमित था, लेकिन मॉडर्नाइजेशन के बाद यह लगभग 4.5 एकड़ में विस्तृत हो जाएगा. बड़े क्षेत्र में विस्तार होने से व्यवस्था और भी सुचारू होगी और भीड़भार की समस्या भी हल होगी.

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