बिहार चुनाव के नतीजों ने सभी को हैरान कर दिया है। जहां बीजेपी ने तमान अनुमान को गलत साबित करते हुए 90 के स्ट्राइक रेट से 89 सीटों पर कब्जा कर लिया। वहीं जदयू की स्ट्राइक रेट काफी बेहतर रही। इन सबके बीच प्रशांत किशोर के जनसुराज के प्रत्याशियों का स्ट्राइक रेट भी 99.16 परसेंट रहा। हालांकि यह प्रदर्शन सीटों के जीतने का नहीं, बल्कि जमानत जब्त कराने में रहा। चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। जितनी भीड़ सभाओं में जुटी, वह वोट में नहीं बदल पाई।


दो फ़ीसदी वोट पर सिमटा ‘जन सुराज’
जन सुराज का प्रदर्शन अत्यंत निराशाजनक रहा। पूरे राज्य में पार्टी का कुल वोट प्रतिशत महज 2% के आसपास रहा। 238 सीटों पर लड़ने के बावजूद, पार्टी बड़े पैमाने पर मतदाताओं को आकर्षित करने में विफल रही। इसका साफ मतलब है कि चुनावी मैदान में उतरने के PK के प्रयोग को बिहार की जनता ने नकार दिया है। यह परिणाम जन सुराज के लिए एक बड़ा झटका है, जिसकी शुरुआत बड़े वादों और प्रचार के साथ की गई थी।

हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार भी रहे बेअसर
पार्टी के कई हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों को भी निराशा हाथ लगी, जो जनता को अपनी तरफ लुभा नहीं सके। करगहर से रितेश पांडे (16,258 वोट), कुम्हरार से के.सी. सिन्हा (15,000 वोट), जोकीहाट से सरफराज आलम (35,234 वोट) और चनपटिया से मनीष कश्यप (37,117 वोट) जैसे चर्चित नामों को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। पूरे राज्य में, केवल मढ़ौरा के नवीन कुमार सिंह ही एकमात्र उम्मीदवार रहे जो रनर-अप (दूसरे स्थान) तक पहुँच सके, जिन्हें 58,170 वोट मिले। बाकी 230 से अधिक सीटों पर जन सुराज लगभग प्रभावहीन रहा और कई जगह तो उसके उम्मीदवार हजार वोट भी नहीं ला सके।











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