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बिहार के इसी सूर्य मंदिर से शुरू हुआ सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा! श्रीकृष्ण के पौत्र राजा शाम्ब को मिली थी श्राप से मुक्ति

पटना : नहाय-खाय के साथ आज से चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो गया। कल बुधवार को लोहंडा है। गुरुवार को अस्ताचलगामी तो शुक्रवार को उगते भगवान भास्कर को अर्घ्य देने घाटों पर श्रद्धा सैलाब उमड़ेगा। भगवान सूर्य व छठी मइया की उपासना को समर्पित पवित्र पर्व छठ का नालंदा से गहरा संबंध रहा है।

बड़गांव सूर्य मंदिर देश की धरोहर एवं अनूठी विरासत है

दरअसल, द्वापर कालीन ऐतिहासिक बड़गांव का सूर्य मंदिर और छठ घाट तालाब कि मान्यता है कि भगवान भास्कर को अर्घ्य देने की परंपरा इसी बड़गांव से शुरू हुई। धीरे-धीरे यह परंपरा अब पूरे देश में आस्था का लोक महापर्व के रूप में मनाया जाता है। इतना ही नहीं देश के 12 अर्कों (प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों) में  एक बड़गांव धाम है मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र राजा साम्ब को बड़गांव में ही सूर्य की उपासना करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली थी।

बड़गांव सूर्यमंदिर के पुजारी बताते हैं कि बड़गांव का पुराना नाम बर्राक था। श्रीकृष्ण ने पौत्र राजा साम्ब को कुष्ठ रोग से निवारण के लिए सूर्य की उपासना के साथ सूर्यराशि की खोज करने की सलाह दी। राजा साम्ब सूर्य राशि की खोज में निकले तो रास्ते में उन्हें प्यास लगी। साथ में चल रहे सेवक को पानी लाने का आदेश दिया। घने जंगल होने के कारण पानी दूर-दूर तक नहीं मिला। एक जगह गड्ढे में पानी तो था। लेकिन, वह काफी गंदा था। सेवक ने उसी गड्ढे का पानी लाकर राजा को दिया। राजा ने पहले उस पानी से हाथ-पैर धोया, उसके बाद पानी को पीया। पानी के पीते ही उनके कुष्ठ रोग दूर हो गए ।

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