बिहार के शहरी निकायों से निकलने वाले गीले और जैविक कचरे का अब इस्तेमाल बायोगैस बनाने में किया जाएगा. इसके लिए राज्य के चार शहरों मुजफ्फरपुर, गयाजी, भागलपुर और बिहारशरीफ में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट लगाए जाएंगे. इन प्लांटों के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
सरकार की योजना के तहत इन प्लांटों का संचालन संबंधित तेल एवं गैस कंपनियां 25 वर्षों तक करेंगी. इस अवधि के लिए नगर निकायों और कंपनियों के बीच दीर्घकालीन रियायत समझौता किया जाएगा. 25 साल की अवधि पूरी होने के बाद प्लांट के संचालन, रखरखाव और उससे होने वाली आय पर संबंधित नगर निकायों का अधिकार होगा.
केंद्र सरकार की पहल पर शहरी क्षेत्रों में कचरे से ऊर्जा तैयार करने के लिए वर्ष 2023 में गोवर्धन योजना के तहत वेस्ट-टू-वेल्थ प्लांट लगाने की शुरुआत की गई थी. इसी योजना के तहत बिहार सरकार ने भी चार शहरों में सीबीजी प्लांट लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.मुजफ्फरपुर, गयाजी, भागलपुर और बिहारशरीफ में प्लांट लगाने के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इन प्लांटों में नगर निकायों से निकलने वाले गीले और जैविक कचरे को प्रसंस्कृत कर उससे बायोगैस तैयार की जाएगी.
नगर विकास विभाग के अनुसार, प्लांट के लिए नि:शुल्क जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकायों की होगी. इसके साथ ही नगर निकाय अलग किया हुआ जैविक कचरा प्लांट तक पहुंचाने के लिए संपर्क पथ और जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे.जलापूर्ति, सीवेज, जल निकासी और बिजली जैसी सुविधाओं की व्यवस्था भी नगर निकायों की ओर से की जाएगी. प्लांट की स्थापना और उसके संचालन में होने वाला पूरा पूंजीगत और संचालन खर्च संबंधित तेल एवं गैस कंपनियां उठाएंगी.
सीबीजी प्लांट से तैयार होने वाली गैस और अन्य उत्पादों के उपयोग एवं बिक्री की जिम्मेदारी संबंधित तेल एवं गैस कंपनी की होगी. इन कंपनियों को इस योजना के लिए इसलिए उपयुक्त माना गया है, क्योंकि उनके पास गैस की बिक्री के लिए पहले से बाजार और वितरण नेटवर्क मौजूद है.












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