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बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और अध्यक्ष राजेश राम की विदाई तय! जिलाध्यक्षों की भी होगी छुट्टी, सियासी ह’लतल तेज

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। चुनाव में हार के बाद से ही नेताओं कार्यकर्ताओं में विवाद देखने को मिल रहा था। इसी बीच अब पार्टी पुराने समीकरण पर लौट सकती है।

माना जा रहा है कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की छुट्टी हो सकती है। दोनों नेताओं से उनकी जिम्मेदारी छीनी जा सकती है। जिसके बाद से ही सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो करारी हार के बाद कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल के साथ-साथ संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद तेज कर दी है।

दोनों से छीनी जाएगी जिम्मेदारी? 

सूत्रों के अनुसार, 61 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद महज 6 सीटें जीतने वाली कांग्रेस में टूट की आशंका के बीच अब बड़े फैसलों की तैयारी चल रही है। हार की जिम्मेदारी राहुल गांधी के करीबी और प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु तथा प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पर डाली जा रही है। दोनों को हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि अल्लावरु और राजेश राम को करीब एक साल पहले ही अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

पुराने सामाजिक समीकरण पर लौटेगी कांग्रेस

दिल्ली में 27 नवंबर 2025 और 24 जनवरी 2026 को हुई रिव्यू मीटिंग के बाद कांग्रेस ने EBC-OBC पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर अपने पारंपरिक वोट बेस भूमिहार, ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम पर फोकस करने का निर्णय लिया है। जातीय सर्वे के मुताबिक ये वर्ग बिहार की कुल आबादी का करीब 44 प्रतिशत हैं। कांग्रेस इसी सामाजिक समीकरण के सहारे 1990 तक बिहार की सत्ता में प्रभावी रही थी। लालू यादव के उदय के बाद यह समीकरण बिखर गया। वर्तमान में सवर्ण और दलित NDA के साथ हैं, जबकि मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा हिस्सा राजद के पास है।

नेतृत्व में बदलाव की तैयारी

पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए इस बार नेशनल सर्च कमेटी का गठन किया जाएगा, ताकि पिछली बार की तरह विवाद न हो। कमेटी 5–6 नाम आलाकमान को भेजेगी, जिनमें से एक को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा। संभावना है कि पार्टी की कमान किसी सवर्ण नेता को दी जाए, जबकि संगठन में दलितों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है।

सभी जिलाध्यक्षों की भी छुट्टी 

जानकारी अनुसार राजेश राम और अल्लावरु के कार्यकाल में नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों की भी छुट्टी तय मानी जा रही है। पार्टी ने 29 नेशनल ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं, जो जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और नए जिलाध्यक्षों के नाम शॉर्टलिस्ट करेंगे। फरवरी के अंत तक सभी जिलाध्यक्षों की घोषणा होने की संभावना है। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष और जून से पहले नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति की जा सकती है।

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