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बिहार सरकार ने राज्य में जन्म और मृ’त्यु पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जारी किया व्यापक रोडमैप

पटना : बिहार सरकार ने राज्य में जन्म और मृ’त्यु पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक रोडमैप जारी किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में प्रत्येक जन्म और मृ’त्यु का समय पर, पूर्ण और नागरिकों के लिए सुगम हो सके। यह रोडमैप बिहार में सिविल रजिस्ट्रेशन एवं वाइटल स्टैटिस्टिक्स (सीआरवीएस) प्रणाली को सुदृढ़ बनाने संबंधी आकलन, विश्लेषण एवं पुनर्रचना (एएआर) रिपोर्ट के प्रसार कार्यशाला में प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला का आयोजन बिहार सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) ने यूनिसेफ और संयुक्त राष्ट्र यूएनईएससीएपी के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में जारी आकलन, विश्लेषण एवं पुनर्रचना (एएआर) रिपोर्ट तथा नागरिक पंजीकरण एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी नीति संक्षेप में जन्म एवं मृ’त्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इनमें ग्राम पंचायत स्तर तक पंजीकरण सेवाओं का विस्तार, पंचायत सचिवों को रजिस्ट्रार के रूप में नामित करना, आंगनवाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और जीविका दीदियों को जन्म एवं मृ’त्यु की सूचना देने की प्रक्रिया से जोड़ना शामिल है।

रिपोर्ट में जन-जागरूकता अभियान को मजबूत करने, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को संस्थागत रूप देने, रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा अस्पताल से डिस्चार्ज के साथ जन्म पंजीकरण को जोड़ने का भी सुझाव है। रिपोर्ट के सुझावों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने तथा मृ’त्यु के कारणों के बेहतर चिकित्सीय प्रमाणीकरण के माध्यम से मृ’त्यु संबंधी आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार लाने पर भी ज़ोर दिया गया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवान सिंह कुशवाहा,  मंत्री, योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार, ने कहा कि जन्म और मृ’त्यु का शत-प्रतिशत पंजीकरण नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और सुशासन को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज़ करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक लोग पंजीकरण के महत्व और इसकी प्रक्रिया से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गांवों में जनगणना और आबादी संबंधी आंकड़ों ने आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद की है, उसी प्रकार जन्म एवं मृ’त्यु पंजीकरण से प्राप्त सटीक आंकड़े सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और जरूरतमंद लोगों तक उनका लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मंत्री ने इस क्षेत्र में यूनिसेफ के सहयोग तथा बिहार के बच्चों और किशोरों के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि जन्म एवं मृ’त्यु पंजीकरण की मजबूत व्यवस्था राज्य के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराने और बेहतर नीतियां बनाने की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जन्म और मृ’त्यु का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए निजी डॉक्टरों, क्लीनिकों और अस्पतालों को भी इस व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है, ताकि इस प्रसंग के समय ही उसका पंजीकरण हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य में शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नियमों और व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की जरूरत है, विशेषकर उन जन्मों के लिए जो स्वास्थ्य संस्थानों के बाहर होते हैं- जिसके लिए पंचायत राज संस्थाओं की भूमिका को और सशक्त बनाया जा सकता है। सिंह ने यूनिसेफ और यूएनईएससीएपी द्वारा दिए जा रहे तकनीकी सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि एक मजबूत जन्म एवं मृ’त्यु पंजीकरण प्रणाली बेहतर शासन, प्रभावी योजना निर्माण और लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य देते हुए बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु का समय पर और सही पंजीकरण केवल एक सरकारी सेवा नहीं, बल्कि बेहतर योजना निर्माण और सुशासन के लिए विश्वसनीय आंकड़ों का आधार है। उन्होंने कहा कि आज के समय में विकास योजनाओं और जनहितकारी कार्यक्रमों की सफलता काफी हद तक सही और अद्यतन आंकड़ों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से नागरिक पंजीकरण व्यवस्था में लगातार सुधार हुआ है, लेकिन अब जरूरत है कि इसे और अधिक सरल, सुलभ तथा आम नागरिकों के अनुकूल बनाया जाए। डॉ. विजयलक्ष्मी ने कहा कि केवल जन-जागरूकता बढ़ाने से ही लक्ष्य हासिल नहीं होगा, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, प्रक्रियाओं का सरलीकरण, एकरूप व्यवस्था और प्रभावी नियम-कायदों की भी आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा विभाग के साथ बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि इससे राज्य में जन्म एवं मृत्यु के शत-प्रतिशत और समयबद्ध पंजीकरण के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

 

यूनिसेफ बिहार की प्रमुख डॉ. मोनिका नीलसन ने जन्म पंजीकरण के क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल करने पर बिहार सरकार को बधाई दी। उन्होंने इसे राज्य की नागरिक पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि राज्य में होने वाले प्रत्येक जन्म और मृत्यु का पंजीकरण पूरी तरह सही, समय पर और बिना किसी चूक के हो। डॉ. नीलसन ने कहा कि जन्म और मृत्यु से संबंधित विश्वसनीय एवं समय पर उपलब्ध आंकड़े न केवल प्रत्येक व्यक्ति की कानूनी पहचान सुनिश्चित करने में मदद करते हैं, बल्कि लोगों के अधिकारों की रक्षा, बेहतर योजना निर्माण और प्रभावी सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यूनिसेफ की ओर से राज्य सरकार को निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार जन्म एवं मृत्यु के शत-प्रतिशत और समयबद्ध पंजीकरण के क्षेत्र में देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

 

रिपोर्ट के निष्कर्षों को प्रस्तुत करते हुए अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में सुधार के बावजूद कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। इनमें शत-प्रतिशत जन्म और मृत्यु का पंजीकरण सुनिश्चित न हो पाना, पंजीकरण में देरी, लोगों में पर्याप्त जागरूकता का अभाव, प्रशिक्षित कर्मियों की कमी, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की चुनौतियां तथा ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में लोगों की पंजीकरण सेवाओं तक सीमित पहुंच प्रमुख हैं।

 

कार्यशाला के दौरान इन चुनौतियों के समाधान और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि प्राप्त सुझावों के आधार पर पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल, प्रभावी एवं नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार की जाएंगी। साथ ही, बिहार में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति भी विकसित की जाएगी। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित सुधारों और नई पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में जन्म एवं मृत्यु के शत-प्रतिशत तथा समयबद्ध पंजीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

 

कार्यक्रम के अंत में अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार सरकार के निदेशक एवं मुख्य जन्म-मृत्यु निबंधक श्री रंजीत कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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