बिहार : बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत और अहम अपडेट सामने आया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर के तहत स्कूल आवंटन की प्रक्रिया एक जनवरी से कई जिलों में शुरू हो चुकी है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 10 जनवरी 2026 तक सभी पात्र शिक्षकों को स्कूल आवंटित कर दिए जाएंगे।

जानकारी के मुताबिक, 31 दिसंबर तक नालंदा जिले को छोड़कर सभी जिलों में पात्र शिक्षकों को प्रखंड आवंटित कर दिया गया था। अब प्रखंड आवंटन के बाद स्कूल आवंटन की कवायद तेज हो गई है। गुरुवार से कैमूर, कटिहार, सुपौल और किशनगंज जैसे जिलों में स्कूल आवंटन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। यह पूरी प्रक्रिया ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जा रही है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न हो।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ई-शिक्षा कोष के जरिए इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर के लिए कुल 41,689 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 27,171 शिक्षकों को जिला आवंटित किया गया। जिला आवंटन के बाद 22,928 शिक्षकों ने प्रखंडों के विकल्प (च्वाइस) भरे, जिनमें से लगभग सभी शिक्षकों को प्रखंड आवंटित किया जा चुका है। अब अंतिम चरण के तौर पर स्कूल आवंटन किया जा रहा है।

इस बीच शिक्षा को लेकर राज्य सरकार की प्राथमिकता भी साफ नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, बिहार सरकार वर्ष 2026-27 के बजट में शिक्षा पर और अधिक खर्च करने की तैयारी में है। शिक्षा विभाग को दो अलग-अलग महकमों में बांटे जाने के बाद बजट का आकार भी बढ़ने की उम्मीद है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 20 वर्षों में बिहार में शिक्षा पर होने वाला व्यय 16–17 गुना तक बढ़ चुका है। वर्ष 2005 में जहां शिक्षा पर 4,341 करोड़ रुपये खर्च होते थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 72,652.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी औसतन हर साल करीब 3,632.6 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

कुल मिलाकर, इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर के तहत स्कूल आवंटन की प्रक्रिया के पूरा होने से हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी और साथ ही सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।













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