डीआइजी अंजनी झा, एसपी अंजनी अंजन व डीसी शशि प्रकाश सिंह ने बताया कि 24 मार्च की रात हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था. पुलिस के अनुसार, 25 मार्च की सुबह मिडिल स्कूल के पीछे मैदान से बच्ची का शव मिला था. वह 24 मार्च की रात रामनवमी के मंगला जुलूस के दौरान लापता हो गयी थी.

परिजनों के बयान पर विष्णुगढ़ थाना में अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ था. 26 मार्च को प्रशिक्षु आइपीएस नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में एसआइटी बनाया गया था. जांच में अंधविश्वास से जुड़े तथ्य सामने आये. गांव की एक कथित भगताइन ने समस्या दूर करने के नाम पर बच्ची की बलि देने की सलाह दी थी.

जांच में भगताइन शांति देवी ने बताया कि मृतका की मां पिछले एक वर्ष से अपने बेटे सुधीर कुमार सिंह की परेशानी को लेकर उसके पास आती रही थी. कहा कि उसने पूर्व में महिला के घर को तंत्र-मंत्र से बांधा भी था. भगताइन द्वारा बच्ची की मां को बताया गया था कि उसके बेटे की परेशानी को हमेशा के लिए दूर करने को लेकर किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी. इस पर मृतका की मां तैयार हो गयी.



पुलिस के अनुसार मृतका की मां पिछले तीन माह में कई बार भगताइन से मिली भी थी, लेकिन भगताइन ने अष्टमी के दिन महिला को अपनी बेटी के साथ पूजा के लिए आने को कहा था. भगताइन ने बताया कि महिला अपने तीनों बच्चों को लेकर शाम सात बजे मंगला जुलूस में शामिल हुई थी. रात लगभग आठ बजे वह अपनी छोटी बेटी को लेकर उसके घर पहुंची.



वहां उसने महिला को बताया कि रात नौ बजे के बाद अच्छा नक्षत्र है, तब उसमें देवास आयेगा. इसके बाद उसने महिला को एक अन्य पुरुष के साथ छोटी बेटी को लाने के लिए कहा, क्योंकि बलि के समय धर-पकड़ के लिए एक आदमी की जरूरत पड़ती. उसके बाद भगताइन द्वारा बताया गया कि मृतका की मां रेशमी देवी गांव के ही एक व्यक्ति भीम राम के साथ बच्ची को लेकर उसके घर पहुंची. महिला को पूजा के लिए 251 रुपये देने थे, लेकिन उसने 20 रुपये ही दिये.




















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